एससीओ बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री और ईरान के उपराष्ट्रपति से मुलाकात की

दुशानबे (ताजिकिस्तान): भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्षों की बैठक के मौके पर कई महत्वपूर्ण मुलाकातें की हैं। उन्होंने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रोजुलजोडा और ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से अलग-अलग मुलाकात की।
प्रधानमंत्री कोहिर रोजुलजोडा के साथ अपनी बातचीत के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने भारत और ताजिकिस्तान के बीच पुराने सभ्यतागत संबंधों और गहरे जन-संपर्क पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ से भी मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात को सुखद बताया और एससीओ बैठक के इतर दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।
राजनाथ सिंह इस क्षेत्रीय समूह की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बैठक की शुरुआत में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति एमोमाली रहमोन ने रक्षा मंत्री और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का 'पैलेस ऑफ द नेशन' में स्वागत किया था।
इससे पहले सोमवार को ताजिकिस्तान पहुंचने पर राजनाथ सिंह ने वहां के रक्षा मंत्री एमोमाली सोबिरजोडा से मुलाकात की। इस दौरान ताजिकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एशिया-प्रशांत प्रभाग के प्रमुख शेराली जोनन भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने भविष्य में अपनी साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।
ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री सोबिरजोडा ने भारत के रक्षा मंत्री की यात्रा पर खुशी जताते हुए कहा कि एससीओ बैठक के माध्यम से उनका स्वागत करना उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बातचीत के दौरान एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक का भी जिक्र किया।
राजनाथ सिंह ने गर्मजोशी से किए गए स्वागत के लिए आभार जताया और कहा कि भारत और ताजिकिस्तान के संबंध बहुत अच्छे हैं। उन्होंने रक्षा के क्षेत्र में इन संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई और 2021 की अपनी पुरानी यात्रा की यादें साझा कीं।
रक्षा मंत्री ने बताया कि ताजिकिस्तान के रक्षा मंत्री के साथ उनकी चर्चा काफी उत्पादक रही। दोनों पक्षों ने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण जैसे आपसी हितों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने पर विचार साझा किए।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संस्कृति, कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था, नवाचार, निवेश और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना है। साथ ही संगठन के वित्तीय और संस्थागत कामकाज की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी।