ताजिकिस्तान के दुशानबे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की

दुशानबे (ताजिकिस्तान): भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशानबे की बुखरो स्ट्रीट पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राजनाथ सिंह यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्षों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसमें सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि भारत इस साल के अंत तक पहले एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम की मेजबानी करेगा। उन्होंने सभी सदस्य देशों को इस पहल में शामिल होने का न्योता दिया, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक संबंधों और आपसी समझ को मजबूत करना है।
राजनाथ सिंह ने ताजिकिस्तान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती और मध्य एशियाई देशों के साथ करीबी रिश्तों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिश्केक में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं ने संगठन के 25 साल के सफर की समीक्षा की और भविष्य की राह पर चर्चा की।
बैठक के इतर रक्षा मंत्री ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रोसुल्जोडा और ईरान के प्रथम उपाध्यक्ष मोहम्मद रजा आरिफ से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान को याद किया, जिसमें एससीओ क्षेत्र में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी।
आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद न केवल मासूमों की जान लेता है, बल्कि निवेश और व्यापार को भी बाधित करता है और समाज में कट्टरपंथ फैलाकर युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित करता है।
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पैसा देने वालों, समर्थन करने वालों और शरण देने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को सामूहिक रूप से खत्म करना होगा। इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इसहाक डार भी मौजूद थे।