RBI ने गल्फ प्रवासियों के लिए खत्म किया स्पेशल ब्याज रेट विंडो, जानिए अब NRE और FCNR डिपॉजिट पर क्या होगा असर

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने गल्फ देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों के लिए एक बड़ा और जरूरी अपडेट जारी किया है। रिजर्व बैंक ने एनआरई (NRE) और एफएनसीआर (बी) (FCNR(B)) खातों के लिए जो खास छूट दी थी, उसे तय समय से पहले ही बंद कर दिया है। यह नियम उन सभी भारतीयों के लिए बेहद अहम है जो यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, बहरीन और कतार में रहकर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई भारत के बैंकों में भेजते हैं। इस बड़े बदलाव के बाद अब बैंकों को मिलने वाली ब्याज दरों की छूट खत्म हो गई है और सब कुछ पुराने नियमों के तहत ही चलाया जाएगा।
क्या था स्पेशल रेट विंडो और क्यों हुई बंद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिजर्व बैंक ने इस साल जून के महीने में एक खास सुविधा शुरू की थी। इसका मकसद देश में विदेशी मुद्रा के भंडार को और ज्यादा मजबूत करना था। इसके तहत बैंकों को एनआरई और एफएनसीआर (बी) डिपॉजिट पर अपनी मर्जी से आकर्षक और लचीली ब्याज दरें तय करने की छूट दी गई थी। यह व्यवस्था मूल रूप से 30 सितंबर 2026 तक चलने वाली थी, लेकिन भारत में जबरदस्त पैसा आने की वजह से इसे समय से पहले ही 31 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया। अब 1 सितंबर 2026 से सभी बैंक फिर से पुराने और सामान्य नियमों के तहत ही काम कर रहे हैं।
प्रांरभिक और अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, इस खास विदेशी मुद्रा जुटाने वाले प्रोग्राम को गल्फ और दुनियाभर के प्रवासियों से जबरदस्त समर्थन मिला। इस मुहिम के तहत कुल $136.377 बिलियन (यानी करीब 13,637 करोड़ डॉलर) का भारी-भरकम फंड जुटाया गया। इसमें अकेले FCNR(B) खातों के जरिए $127.226 बिलियन, विदेशी कमर्शियल उधार से $3.89 बिलियन और ओवरसीज विदेशी मुद्रा उधार से $5.26 बिलियन की रकम शामिल है।
गल्फ के प्रवासियों पर इसका क्या असर पड़ेगा
जो भारतीय भाई गल्फ देशों में नौकरी या बिजनेस करते हैं, उनके लिए अब वे खास और बढ़ी हुई ब्याज दरें गारंटीड नहीं रहेंगी जो जून से अगस्त के बीच मिल रही थीं। अगर आपने 1 सितंबर या उसके बाद बैंक में नया पैसा जमा किया है या फिर पुराने डिपॉजिट को रिन्यू कराया है, तो आपको बैंकों की नई और अपडेटेड रेट शीट के हिसाब से ही फायदा मिलेगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि अकेले UAE से भारत में सबसे ज्यादा पैसा भेजा जाता है, जो वित्त वर्ष 2023-24 के कुल इनवर्ड रेमिटेंस का 19.2% हिस्सा है। इसलिए इस बदलाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले हमारे कामगारों और व्यापारियों पर सीधा पड़ता है।
खाते के प्रकार और टैक्स को लेकर जरूरी बातें
पैसा जमा करने से पहले हर प्रवासी को यह समझ लेना चाहिए कि उनका खाता किस कैटेगरी में आता है। एफएनसीआर (बी) खाते विदेशी मुद्रा में रखे जाते हैं, जिससे रुपये के घटने-बढ़ने के जोखिम से सुरक्षा मिलती है। वहीं दूसरी तरफ, एनआरई खाते भारतीय रुपये में ही मेंटेन किए जाते हैं। टैक्स के नियमों की बात करें तो योग्य अनिवासी भारतीयों के लिए एनआरई और एफएनसीआर (बी) खातों पर मिलने वाला ब्याज आम तौर पर टैक्स फ्री होता है, जबकि एनआरओ खातों के नियम पूरी तरह से अलग होते हैं। राहत की बात यह है कि जो पुराने डिपॉजिट पहले से बुक हो चुके हैं, उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और बैंक मेच्योरिटी तक पुराने तय नियमों का ही पालन करेंगे।
नया पैसा जमा करने से पहले किन 5 बातों का रखें ध्यान
रिजर्व बैंक ने सभी एनआरई और गल्फ में रहने वाले प्रवासियों को सलाह दी है कि वे बैंक में नया पैसा डालने से पहले इन पांच बातों की जांच जरूर कर लें:
- बैंक की ताजा और आधिकारिक रेट शीट की अच्छी तरह जांच कर लें।
- यह कंफर्म कर लें कि ब्याज की नई दरें नए डिपॉजिट पर मिल रही हैं या पुराने को रिन्यू करने पर।
- समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाली पेनल्टी के बारे में पूरी जानकारी ले लें।
- एफएनसीआर (बी) के लिए अपनी विदेशी मुद्रा की जरूरतों का सही आकलन कर लें।
- अपने बैंक खाते की केवाईसी और फेमा (FEMA) से जुड़े रेजिडेंशियल स्टेटस के कागजात एकदम अपडेट रखें।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाह या बाजार की सुनी-सुनाई बातों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें। हमेशा बैंक की ऑफिशियल ब्रांच या उनके मोबाइल बैंकिंग ऐप पर जाकर ही फाइनल ब्याज दरों की पुष्टि करें, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।