Red Sea Tensions: हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों से लाल सागर में तनाव, सऊदी अरब और ग्लोबल ट्रेड पर मंडराया खतरा

Praggya Singh sabal19 September 20262 min read18 viewsSaudi
Red Sea Tensions: हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों से लाल सागर में तनाव, सऊदी अरब और ग्लोबल ट्रेड पर मंडराया खतरा

लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच अब हालात काफी गंभीर हो गए हैं। हूती विद्रोहियों की तरफ से लगातार हो रहे हमलों और क्षेत्रीय शांति प्रक्रिया को लेकर Hamad Bin Khalifa University के पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर और RUSI के सीनियर एसोसिएट फेलो Professor Sultan Barakat ने बड़ा विश्लेषण पेश किया है। उन्होंने 13 सितंबर 2026 को अल-जazeera में छपे अपने ओपिनियन पीस में इन हमलों के रणनीतिक प्रभावों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर खुलकर बात रखी है।

हूती विद्रोहियों का कब्जा और सऊदी अरब पर बढ़ता दबाव

19 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह शहर और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास स्थित कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इन द्वीपों में ग्रेटर और लेसर हानिश भी शामिल हैं। इस कब्जे के बाद से इलाके में संघर्ष काफी तेज हो गया है। यमन की सरकारी सेना, जिसे सऊदी अरब के हवाई हमलों का समर्थन मिल रहा है, इस ईरान समर्थित समूह को खदेड़ने के लिए लगातार भीषण लड़ाई लड़ रही है। इस पूरे घटनाक्रम की वजह से सऊदी अरब पर काफी दबाव बढ़ गया है। देश की सीमा और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर लगातार खतरे मंडरा रहे हैं, जिसमें मक्का को लेकर हूती तरफ से दी गई धमकियों की खबरें भी शामिल हैं।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नौसेना गठबंधन और कड़े कदम

इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय निकायों और गठबंधनों ने तेजी से कदम उठाए हैं। 18 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय Naval Defense Coalition का गठन किया गया, जो समुद्री सुरक्षा के लिए समुद्र में गश्त करेगा और कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा करेगा। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की हाई रिप्रेजेंटेटिव Kaja Kallas ने घोषणा की कि Operation Aspides का अलर्ट स्तर बढ़ा दिया गया है। उन्होंने सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अस्वीकार्य बर्बादी बताया है। इससे पहले 15 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक भी हुई थी, जिसमें सभी सदस्यों ने तनाव को तुरंत कम करने की मांग की थी।

शिपिंग कंपनियों का फैसला और वैश्विक व्यापार पर असर

इस तनाव भरे माहौल के बीच, Maersk और Hapag-Lloyd जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों ने लगभग 19 सितंबर 2026 से स्वेज नहर के रास्ते कुछ एशिया-यूरोप रूटों को फिर से शुरू करने की योजना बनाई है। उद्योग जगत के कई लोगों के लिए यह फैसला थोड़ा हैरान करने वाला है। हूती मानवीय संचालन केंद्र यानी HOCC ने 10 सितंबर 2026 को यह बयान दिया था कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग सुरक्षित हैं, हालांकि वे सऊदी जहाजों पर बैन अभी भी लागू रखे हुए हैं। साल 2023 के आखिर से ही इस लगातार बनी अशांति के कारण कई कार्गो जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन की लागत काफी बढ़ गई है।

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