क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारी जाएंगे तेहरान
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिए ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा करेंगे।

तेहरान: क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बातचीत करने के लिए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा करेंगे। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी अली बघेरी ने इस दौरे की जानकारी दी है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन शामिल होंगे। ये सभी अधिकारी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसेन रजाई के साथ मुलाकात करेंगे।
बघेरी ने बताया कि यह दौरा पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग के जरिए सुरक्षा बढ़ाने की कोशिशों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने पिछले हफ्ते की अपनी यात्रा के दौरान मेजर जनरल मोहसेन रजाई के साथ बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों के तेहरान आने के फैसले की जानकारी दी थी।
ईरानी अधिकारी ने कहा कि ईरान की अपनी आंतरिक क्षमताओं पर आधारित रक्षा प्रणाली राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सफल मॉडल बन गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की रणनीति क्षेत्रीय देशों के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित करना और अमेरिकी व ज़ायोनी शासन के किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का मुकाबला करना है।
बघेरी के मुताबिक, पश्चिम एशिया के क्षेत्र में इज़राइल की भूमिका क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक खतरा है। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल तीनों देश ईरान के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा के ढांचे के भीतर एक प्रभावी कदम उठा सकते हैं।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अक्टूबर की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि तुर्की और पाकिस्तान मक्का गठबंधन के तहत सऊदी अरब की मदद करना चाहते हैं। ट्रंप ने सैन्य बलों की तैनाती के इस कदम को सही बताया था।
5 अक्टूबर को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का डिफेंस एलायंस के तहत सामूहिक रक्षा उपायों को सक्रिय करने पर सहमति जताई थी। रियाद में हुई एक आपात बैठक में यह फैसला लिया गया था ताकि यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे हमलों के बीच सऊदी अरब में सैन्य क्षमताओं की तेजी से तैनाती की जा सके।