Remittance Cost: भारत सरकार का बड़ा ऐलान, रेमिटेंस चार्ज घटने से भारतीय कामगारों को होगी 5 अरब डॉलर की बचत.

विदेशों में मेहनत मजदूरी और नौकरी करने वाले हमारे भारतीय प्रवासियों के लिए एक बहुत ही काम की और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत सरकार के वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी साझा की है कि अगर विदेशों से भारत पैसे भेजने का खर्च यानी रेमिटेंस कॉस्ट को मौजूदा 5 से 6 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया जाए, तो इससे हमारे प्रवासी कामगारों को सालाना पूरे 5 अरब अमेरिकी डॉलर यानी बहुत बड़ी रकम की सीधी बचत होगी। यह बात उन्होंने मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest (GFF) 2026 के मंच से कही है। गल्फ देशों और दुनिया के दूसरे कोनों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह एक बहुत बड़ा कदम साबित हो सकता है जो हर महीने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने घर परिवार के पास भेजते हैं। इस पूरी जानकारी के बारे में आप विस्तार से ANI News पर पढ़ सकते हैं।
भारत में आता है भारी-भरकम रेमिटेंस
आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल दुनिया भर से कुल मिलाकर 125 अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा का रेमिटेंस यानी पैसा भेजा जाता है। वाणिज्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि इतनी बड़ी राशि के ट्रांसफर में टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। जब लोग विदेश से अपने घर पैसा भेजते हैं, तो उसका एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन फीस और कमीशन में कट जाता है, जिससे भेजने वाले की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बीच में ही कम हो जाता है। सरकार इसी खर्च को कम करने के लिए लगातार नए तरीकों पर काम कर रही है ताकि प्रवासियों की मेहनत का पूरा पैसा उनके परिवारों तक पहुंच सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन और UPI का विस्तार
सरकार का यह कदम प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस उद्देश्य से पूरी तरह मेल खाता है जो उन्होंने इस फेस्ट के उद्घाटन के दौरान देश के सामने रखा था। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को मुंबई में Global Fintech Fest 2026 के सातवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए फिनटेक सेक्टर से जुड़े लोगों को यह सलाह दी थी कि वे Unified Payments Interface (UPI) की पहुंच को पूरी दुनिया में आक्रामक तरीके से बढ़ाएं। प्रधानमंत्री ने इस बात को बहुत साफ तौर पर रखा था कि विदेश से पैसे भेजने के दौरान एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ बैंक और ट्रांजैक्शन फीस के रूप में खत्म हो जाता है। अगर हमारे देश के पेमेंट सिस्टम UPI को दूसरे देशों के पेमेंट नेटवर्क के साथ जोड़ दिया जाए, तो इससे न सिर्फ पैसा भेजने का खर्च बहुत कम हो जाएगा बल्कि घर-परिवारों तक रकम बेहद तेजी से पहुंच जाएगी।
कई देशों में पहले से काम कर रहा है UPI
आपको बता दें कि आज के समय में हमारा स्वदेशी UPI कुल 11 देशों में पूरी तरह से काम कर रहा है और इसके अलावा इसे सिंगापुर के लोकल पेमेंट नेटवर्क के साथ भी सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। प्रधानमंत्री ने देश के फिनटेक उद्योग से यह अपील की कि वे अब केवल ग्लोबल पेमेंट टेक्नोलॉजी को अपनाने वाले तक सीमित न रहें, बल्कि खुद आगे बढ़कर इंटरनेशनल स्टैंडर्ड सेट करें। उन्होंने कंपनियों से मजबूत साइबर सुरक्षा और ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े पुख्ता उपाय करने के लिए भी कहा है। सरकार का मुख्य ध्यान उन देशों में यूपीआई का दायरा बढ़ाने पर है जहां भारतीय मूल के लोग यानी प्रवासी बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं या जिन देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध बहुत मजबूत हैं।