रियाद एयरपोर्ट हमला: बांग्लादेशी मुफ्ती अल-बदर की मौत

रियाद: रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हूती मिलिशिया के हमले में घायल हुए बांग्लादेशी मुफ्ती और प्रचारक नसरुल्लाह अल-बदर ने 11 अक्टूबर 2026 को दम तोड़ दिया। वे 45 बांग्लादेशी विद्वानों और शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उमराह के लिए सऊदी अरब आए थे। इस हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने इसे "कायराना आतंकी कार्रवाई" और "पूर्ण युद्ध अपराध" करार दिया है।
सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन के मुताबिक, एयरपोर्ट के टर्मिनल 4 को एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया, जिससे आग लग गई और भारी तबाही हुई। इस हमले में 12 लोगों की जान गई और 309 लोग घायल हुए। मृतकों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी नागरिक और अमेरिका, जॉर्डन, फिलिस्तीन, सीरिया, सूडान और मिस्र के लोग शामिल हैं। अल-बदर उन्हीं घायलों में थे, जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई।
हूती मिलिशिया ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उसका दावा है कि किंग खालिद एयरपोर्ट के अलावा दम्माम के किंग फहद एयरपोर्ट और अरामco की सुविधाओं पर हुए हमले जवाबी कार्रवाई थे। हालांकि इन दावों के पक्ष में कोई स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं तेजी से आईं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले को "अस्वीकार्य" बताया, जबकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मृतकों में एक अमेरिकी नागरिक के शामिल होने की बात कही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरेश और यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हांस ग्रुंडबर्ग ने संयुक्त रूप से निंदा करते हुए हूती मिलिशिया से हिंसा रोकने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने की अपील की।
बांग्लादेश, जॉर्डन, सीरिया और पोलैंड की सरकारों के साथ यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने भी हमले की कड़ी निंदा की है। सऊदी सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त जवाब देने का वादा किया है। अल-बदर के निधन से बांग्लादेश के धार्मिक हलकों में शोक की लहर है, और उमराह पर गए प्रतिनिधिमंडल की वापसी और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।