रियाद हवाई अड्डा हमला: कतर ने हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की

Lov Singh11 October 20262 min read0 views
रियाद हवाई अड्डा हमला: कतर ने हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की

रियाद, सऊदी अरब: कतर ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग ख़ालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की औपचारिक रूप से निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने 10 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में इन हमलों को सऊदी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताया और कहा कि इनसे नागरिकों, नागरिक ढांचे, हवाई नेविगेशन और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को सीधा खतरा है।

हमले 8 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच हुए, और इनमें अब तक 15 लोगों की मौत और 300 से ज़्यादा लोगों के घायल होने की बात सामने आई है। सऊदी अरब में पिछले एक दशक में ऐसे घातक हमले पहली बार हुए हैं। 10 अक्टूबर की घटना में हवाई अड्डे पर मारे गए 12 लोगों में एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल था। हमलों की तीव्रता को देखते हुए किंग ख़ालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कामकाज अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

कतर का समर्थन और क्षेत्रीय सुरक्षा का सवाल

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11 अक्टूबर 2026 को कतर ने अपने रुख को दोहराते हुए सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता जताई। दोहा ने कहा कि सऊदी अरब अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा के लिए जो भी वैध कदम उठाएगा, कतर उसका समर्थन करता है। मंत्रालय के मुताबिक़ सऊदी अरब की स्थिरता कतर की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है, और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सामूहिक सुरक्षा ढांचे में भी इसकी अहम भूमिका है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज़ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरेस ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी हिंसा की आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इन हमलों को नागरिक ढांचे के खिलाफ आतंकी हमले के रूप में वर्गीकृत किया है, जबकि तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भी वैश्विक निंदा में अपनी आवाज़ मिलाई है।

हवाई अड्डे जैसे ठिकानों पर हमले सिर्फ़ एक देश की चिंता नहीं रह जाते। हवाई यातायात रुकने का असर खाड़ी के कई देशों में फैले यात्रियों और कामगारों पर पड़ता है, इसलिए कतर के इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

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