रियाद एयरपोर्ट पर हूती हमले की ब्रिटेन ने की कड़ी निंदा

रियाद: सऊदी अरब पर हूती हमलों को लेकर ब्रिटेन के विदेश सचिव ने सख़्त रुख़ अपनाया है। 11 अक्टूबर 2026 को उन्होंने सऊदी विदेश मंत्री से फ़ोन पर बात करते हुए इन हमलों की औपचारिक निंदा की। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक़ यह बातचीत उसी दिन हुई जब राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया था।
हमले 10 और 11 अक्टूबर को हुए। शनिवार के हमले में 12 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था, जिसने रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हमले में 300 से ज़्यादा लोग घायल हुए। रविवार को एक और प्रोजेक्टाइल टर्मिनल पर गिरा, जिससे आग लगी और कुछ और लोग घायल हो गए।
ब्रिटेन और सऊदी अरब की नई पहल
हमलों के बाद ब्रिटेन ने सिर्फ़ बयान ही नहीं दिए। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने पुष्टि की कि साइप्रस में तैनात रॉयल एयर फ़ोर्स के विमानों से सऊदी अरब को हवा में ईंधन भरने (एयर-टू-एयर रीफ़्यूलिंग) की रक्षात्मक सहायता दी जाएगी। इसका मक़सद लाल सागर में जहाज़ों की सुरक्षा करना और क्षेत्रीय आक्रामकता का मुक़ाबला करना बताया गया है। रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने इस घटनाक्रम को "ख़तरनाक बढ़ोतरी" कहा और दोहराया कि ब्रिटेन सऊदी अरब को हवाई रक्षा सहायता देता रहेगा।
ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय (FCDO) ने अपनी यात्रा सलाह भी बदल दी है। अब सऊदी अरब की यात्रा केवल ज़रूरी कामों तक सीमित रखने की सलाह दी गई है। उधर सऊदी अधिकारियों ने रियाद एयरपोर्ट का बंद रहना बढ़ा दिया है और स्कूलों में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन पढ़ाई होगी।
रिपोर्टों के अनुसार इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार घटने पर सऊदी अरब ने फ़्रांस, मिस्र, पाकिस्तान और ब्रिटेन से अतिरिक्त सैन्य सहयोग माँगा है। वहीं हूती विद्रोही संगठन ने मक्का और मदीना के एयरपोर्ट को छोड़कर बाक़ी सऊदी हवाई अड्डों को सैन्य कार्रवाई का क्षेत्र घोषित कर दिया है और आम नागरिकों व एयरलाइन कर्मचारियों से इलाक़े से दूर रहने को कहा है।
इन हमलों की दुनिया भर में आलोचना हुई। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ॉन डेर लेयेन समेत कई देशों ने 11 अक्टूबर को इनकी निंदा की। इनमें जर्मनी, फ़्रांस, रूस, कनाडा, भारत, मलेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, यूएई और इराक़ जैसे देश शामिल हैं। भारत के लिए यह ख़बर इसलिए भी अहम है क्योंकि हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई है, और रियाद में रहने वाले बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय अब हालात पर नज़र रखे हुए हैं।