क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी सिविल डिफेंस ने रियाद में अर्ली वार्निंग सिस्टम शुरू किया ताकि लोगों को समय पर चेतावनी मिल सके
क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब के रियाद में अर्ली वार्निंग सिस्टम शुरू किया गया है। हूती हमलों और जवाबी कार्रवाई से स्थिति तनावपूर्ण है।

रियाद: सऊदी सिविल डिफेंस ने 25 अक्टूबर 2026 से रियाद में अर्ली वार्निंग सिस्टम को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं और सीमा पार हमलों में तेजी आई है।
तनाव तब और बढ़ गया जब 24 अक्टूबर 2026 को हूती बलों ने सऊदी तेल सुविधाओं, हवाई अड्डों और एक एयर बेस के खिलाफ अभियान चलाने का दावा किया। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर आने वाली दो बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोक लिया गया।
इन मिसाइलों का मलबा मक्का, जेद्दा, ताइफ और राबिघ समेत चार जगहों पर गिरा। दूसरी ओर, हूती प्रवक्ताओं ने पवित्र स्थलों को निशाना बनाने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके हमले केवल सैन्य और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर केंद्रित हैं।
जवाबी कार्रवाई में सऊदी बलों ने सना और मोचा बंदरगाह शहर में हवाई हमले किए। हूती मीडिया के मुताबिक, सना में हुए इन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है।
इसी बीच यमन के सूचना मंत्री के एक सलाहकार ने 24 अक्टूबर को हूती बलों पर धार्मिक स्थलों का सैन्य इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यमनी समाचार एजेंसी सबा की रिपोर्ट के अनुसार, हूती लड़ाकों ने 157 मस्जिदों को सैन्य बैरकों और हथियारों के डिपो में बदल दिया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विस्फोटकों के जरिए 80 मस्जिदों को नष्ट कर दिया गया, जबकि 41 अन्य को भारी नुकसान पहुंचा है। आंकड़ों के मुताबिक, सना में 282 और सादा में 115 मस्जिदें इन गतिविधियों से प्रभावित हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने इससे पहले 2 अक्टूबर 2026 को भी मस्जिदों की बमबारी और कब्जे की निंदा की थी। सरकार अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हूती मिलिशिया पर सख्त हथियारों की embargo और वित्तीय प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही है।