Riyadh में भारतीय क्रेन ऑपरेटर की नींद में मौत, शव पहुंचा आजमगढ़ तो परिवार में मचा कोहराम.

Praggya Singh sabal19 September 20263 min read32 viewsExpat Issues
Riyadh में भारतीय क्रेन ऑपरेटर की नींद में मौत, शव पहुंचा आजमगढ़ तो परिवार में मचा कोहराम.

गल्फ में नौकरी का सपना देखने वाले एक और भारतीय परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के रहने वाले 40 साल के क्रेन ऑपरेटर Chandrika Yadav (जिन्हें Rajesh Yadav भी कहा जाता है) की सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सोते समय अचानक मौत हो गई। वह सिंघदा गांव के रहने वाले थे और उनके पिता का नाम Vijai Yadav है। इस घटना के बाद से उनके घर में मातम पसरा हुआ है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। विदेश में काम करने वाले प्रवासियों के परिवारों के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है, जो अपनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं।

कैसे हुई घटना और कब आया शव

मिली जानकारी के अनुसार, Chandrika Yadav ने अपनी शिफ्ट पूरी की थी, जिसके बाद उन्होंने खाना खाया और अपने कमरे में सोने चले गए। इसके बाद अगली सुबह वह अपने बिस्तर पर मृत पाए गए। उनके परिवार में उनकी पत्नी Renu Yadav, मां Lalati Yadav और चार छोटे बच्चे हैं, जिनके सिर से पिता का साया उठ गया है। परिवार को मौत का कोई ठोस चिकित्सीय कारण नहीं बताया गया है, सिवाय इसके कि उनकी मौत नींद में हुई थी। उनका पार्थिव शरीर शनिवार, 19 September 2026 को उनके पैतृक गांव पहुंचा, जहां गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल

यह अकेली घटना नहीं है, बल्कि गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों के साथ ऐसी त्रासदी लगातार सामने आती रही है। Ministry of External Affairs के रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 2023 से 2025 के बीच विदेश में काम के दौरान 800 से ज्यादा भारतीयों की जान चली गई है। इनमें से लगभग 55 प्रतिशत मौतें अकेले गल्फ देशों में ही हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अकेले सऊदी अरब में ऐसे 182 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि यूएई में यह आंकड़ा 128 रहा है। इसके अलावा, जून 2026 में कतर के रास लाफ्फन/बर्जान गैस प्लांट में हुए एक धमाके में भी प्लांट रीस्टार्ट के दौरान 12 भारतीय मजदूरों की जान चली गई थी।

कानूनी मुकदमों और बायोमेट्रिक स्कैम से जुड़ी बड़ी परेशानियां

गल्फ में सिर्फ मौतों का खतरा ही नहीं, बल्कि कानूनी और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं भी प्रवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। पंजाब के पठानकोट के रहने वाले ट्रक ड्राइवर Baljinder Singh, जो दुबई में एक दशक से काम कर रहे थे, उन्हें सऊदी अरब में एक नारकोटिक्स मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई गई है। उनका दावा था कि जिस पार्सल को लेकर यह मामला बना, उसमें केवल दवाइयां थीं। अब उनका परिवार भारत सरकार से इस मामले में कूटनीतिक और कानूनी मदद की गुहार लगा रहा है। इसके अलावा, दुबई में भारतीय समूदाय को निशाना बनाने वाले फर्जी एजेंटों के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है। Consulate General of India in Dubai ने पिछले साल 31 August को एक एडवाइजरी जारी कर बायोमेट्रिक घोटालों के प्रति आगाह किया था। इन घोटालों में फर्जी जॉब और वीजा ऑफर के नाम पर कामगारों के फिंगरप्रिंट और चेहरे के स्कैन अवैध रूप से लिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता है। ठगी के शिकार हुए लोगों को Pravasi Bharatiya Sahayata Kendra के टोल-फ्री नंबर 80046342 पर या व्हाट्सएप/एसएमएस के जरिए +971-543090571 पर संपर्क करने के निर्देश दिए गए थे।

मुआवजे और पारदर्शिता को लेकर अभी भी बनी हुई है चिंता

विदेश मंत्री S. Jaishankar ने एक संसदीय पैनल को जानकारी दी थी कि साल 2026 में पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के दौरान भारत ने लगभग 10 million यानी एक करोड़ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी। इसके बावजूद प्रवासी मजदूरों के परिवारों के मन में कई सवाल अब भी बने हुए हैं। मृत कामगारों की मेडिकल रिपोर्ट में पारदर्शिता की कमी, बीमा के पैसों का स्टेटस, नौकरी खत्म होने पर मिलने वाले बकाये का निपटारा और साल 2026 में कार्यस्थल पर हुई मौतों का सटीक आंकड़ा आज भी एक बड़ा विषय बना हुआ है। 19 September 2026 तक भी कई पीड़ित परिवार जरूरी दस्तावेजों और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

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