रियाद रिफाइनरी में लगी भीषण आग, हूती विद्रोहियों ने किया हमले का दावा

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब शनिवार को राजधानी रियाद के दक्षिण में स्थित एक प्रमुख सऊदी अरामको (Aramco) रिफाइनरी में आग भड़क उठी। इस घटना के तुरंत बाद यमन के हूती विद्रोहियों ने इस पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए सनसनीखेज दावा किया। दूसरी ओर, ईरान द्वारा रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखे जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और गहरी हो गई है। आसमान में उठते काले धुएं के गुबार और मौके पर दौड़ती आपातकालीन गाड़ियों ने इस सुरक्षा संकट को और स्पष्ट कर दिया है।
हूती विद्रोहियों का दावा और सऊदी गठबंधन की प्रतिक्रिया
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने बयान जारी कर कहा कि उनके संगठन ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का उपयोग करके इस सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया है। हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह केवल विद्रोही गुटों की हार से ध्यान भटकाने का एक भ्रामक प्रयास है। अरामको ने अभी तक आग के सटीक कारणों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय गवाहों ने घटनास्थल पर भारी अफरा-तफरी और राहत कार्यों की पुष्टि की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रुख
इस बीच, क्षेत्रीय तनाव का दायरा ऊर्जा आपूर्ति लाइनों तक फैल गया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने स्पष्ट किया है कि जब तक जून में हुए इस्लामाबाद समझौते की सात शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने संकेत दिया है कि यदि वाशिंगटन एक निश्चित योजना को स्वीकार कर ले, तो इसे सात दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी व्हाइट हाउस के बाहर इस मामले में जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेने के संकेत दिए हैं।
यमन में सैन्य कार्रवाई और वैश्विक असर
जमीनी स्तर पर संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। सऊदी समर्थित गठबंधन ने यमन में बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई करते हुए दर्जनों सटीक हमले किए, जिससे भारी नुकसान का दावा किया गया है। दूसरी ओर, हूती समर्थक मीडिया ने भी कई इलाकों में हवाई हमलों का आरोप लगाया है। इस भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री सुरक्षा बिगड़ने के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां बढ़ने लगी हैं, जिसका असर विमानन मार्गों और आम नागरिकों पर भी साफ देखा जा रहा है।