RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान, प्रवासी भारतीयों को अपनी कर्मभूमि के प्रति रखनी चाहिए वफादारी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित किया। शनिवार, 29 अगस्त 2026 को आयोजित इस 'यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में उन्होंने देश-विदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। इस आयोजन को अमेरिकन हिंदुज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) द्वारा आयोजित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और संघ प्रमुख की बातों को ध्यान से सुना।
कर्मभूमि और जन्मभूमि का अंतर समझाया
अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख ने प्रवासी भारतीयों को एक बहुत बड़ी सीख दी और उनकी जिम्मेदारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत भले ही भारतीय प्रवासियों की 'जन्म भूमि' यानी जन्म का स्थान है, लेकिन जिस देश में वे अभी रह रहे हैं वह उनकी 'कर्म भूमि' यानी कामकाज और रोजी-रोटी की जगह है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रवासियों का यह कर्तव्य बनता है कि वे अपनी कर्मभूमि के प्रति पूरी तरह वफादार रहें और वहां के नियमों व कर्तव्यों को सबसे पहले पूरा करें।
मोहन भागवत ने आगे बताया कि स्थानीय जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को पूरा करने के बाद यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से भारत देश के लिए कुछ योगदान देना चाहता है, तो ऐसा करना बिल्कुल संभव है, लेकिन यह किसी पर भी जबरन थोपा नहीं गया है यानी यह पूरी तरह से अनिवार्य नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत हमेशा यह उम्मीद करता है कि उसका प्रवासी समाज उन अच्छे संस्कारों और मूल्यों को हमेशा बनाए रखेगा जो उन्हें सिखाए गए हैं, क्योंकि विविधता में एकता ही हमारे देश की असली पहचान और संस्कृति की रगों में बसी है।
विवाद और विरोध प्रदर्शनों पर भी रखी बात
इस दौरे के दौरान घरेलू मुद्दों पर बात करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि यदि कोई भी हिंदू यह सोचता है या मानता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए या वे यहां नहीं रहने चाहिए, तो वह व्यक्ति कभी भी सच्चा हिंदू नहीं कहला सकता। आपको बता दें कि मोहन भागवत का यह न्यूयार्क दौरा एक बड़े तीन-देशों के आउटरीच टूर का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत मंगलवार को हुई थी और इसमें कनाडा तथा ब्रिटेन देश भी शामिल हैं। यह पूरा दौरा आरएसएस के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में यानी शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। अपने इस प्रवास के दौरान उन्होंने एक इस्कॉन मंदिर का भी दौरा किया था, जहां उन्होंने भोजन वितरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया और इंसानी मानवता को जोड़ने वाली चेतना की ताकत पर अपनी बात रखी।
हालांकि, न्यूयार्क में हुआ यह कार्यक्रम पूरी तरह से विवादों से भी अछूता नहीं रहा और इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेताओं में शामिल अमेरिकन इंडिया पब्लिक Affairs कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेवनी ने इस आयोजन को एक बेहद यादगार पल करार दिया। इसके विपरीत, न्यूयार्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने इस पूरे आंदोलन और कार्यक्रम का विरोध करते हुए इसे एक भेदभावपूर्ण सोच बताया। इसके अलावा, सुनीता विश्वनाथ के नेतृत्व में 'हिंदुज फॉर ह्यूमन राइट्स' संगठन समेत करीब 61 अंतरधार्मिक और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर करके इस कार्यक्रम के खिलाफ अपना विरोध जताया और कहा कि आरएसएस और उसकी हिंदुत्व विचारधारा उनका प्रतिनिधित्व नहीं करती है। इस तमाम विरोध और हंगामे के बीच, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए मेयर जोहरान ममदानी से अपील की थी कि वे कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि समारोह को बाधित करने की लगातार कोशिशें की जा रही थीं।