रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान पर पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव रोका, जानिए क्या है पूरा मामला.

Aanya10 September 20263 min read27 viewsWorld
रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान पर पाबंदियां लगाने का प्रस्ताव रोका, जानिए क्या है पूरा मामला.

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर बड़ा कूटनीतिक गतिरोध सामने आया है जहाँ रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंध दोबारा लगाने के प्रयासों को औपचारिक रूप से ब्लॉक कर दिया है। यह घटनाक्रम 10 सितंबर 2026 को हुई उस उच्च स्तरीय बैठक के बाद सामने आया है जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर गंभीर चर्चा की गई थी। इससे पहले 9 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने पिछले दो दशकों में पहली बार ईरान को औपचारिक रूप से सुरक्षा परिषद में भेजा था, क्योंकि ईरान अपने परमाणु दायित्वों का पालन करने में लगातार विफल रहा था।

परमाणु गतिविधियों पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय तनाव

IAEA की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य कारण यह है कि ईरान घोषित किए बिना छोड़े गए स्थलों पर यूरेनियम के निशानों का संतोषजनक हिसाब नहीं दे पाया है। इसके अलावा, ईरान के पास मौजूद 440.9 किलोग्राम यानी लगभग 972 पाउंड 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक की निगरानी लगातार नहीं हो पा रही है। एजेंसी के महानिदेशक Rafael Grossi ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह खतरनाक सामग्री भविष्य में लगभग 10 परमाणु हथियार विकसित करने के काम आ सकती है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए पश्चिमी देश ईरान पर दोबारा पुराने प्रतिबंध लागू करवाना चाहते थे ताकि उसकी परमाणु गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।

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रूस और चीन का कड़ा रुख

सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान रूसी दूत Vasily Nebenzya ने साफ शब्दों में कहा कि मॉस्को किसी भी कीमत पर ईरान पर पाबंदियां फिर से लागू नहीं होने देगा। उनका तर्क था कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 2231 और उससे जुड़ी स्नैपबैक प्रक्रिया की समयसीमा 18 अक्टूबर 2025 को ही समाप्त हो चुकी है। चीन ने भी इस बात का पूरा समर्थन किया और कहा कि अब स्नैपबैक तंत्र कानूनी रूप से वैध नहीं बचा है। चीनी अधिकारियों का यह भी मानना है कि मौजूदा संकट के लिए अमेरिका का साल 2015 के ज्वाइंट कॉम्प्रहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन यानी जेसीपीओए से एकतरफा बाहर निकलना जिम्मेदार है। इसके विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस का यह दावा है कि स्नैपबैक प्रक्रिया को कानूनी तरीके से सितंबर 2025 में शुरू किया गया था और यह 28 सितंबर 2025 को पूरी हो गई थी, जिसके तहत छह पुराने चैप्टर VII संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव बहाल हो चुके हैं।

सुरक्षा परिषद की वोटिंग और समिति की स्थिति

रूस और चीन के कड़े विरोध के बावजूद सुरक्षा परिषद में बैठक के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 11-2 के बहुमत से मतदान हुआ। हालांकि इसके बाद भी 1737 Sanctions Committee फिलहाल पूरी तरह से निष्क्रिय बनी हुई है। इस समिति को ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वर्तमान में इसके पास न तो कोई नेतृत्व है और न ही विशेषज्ञों का कोई सक्रिय पैनल बचा हुआ है। इस बीच, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने चेतावनी देते हुए कहा है कि हालिया सैन्य हमलों के बाद देश का रुख अब अधिक आक्रामक हो गया है और खेल के नियम पूरी तरह से बदल चुके हैं। हालांकि इस बैठक में यमन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा होनी थी, लेकिन मुख्य ध्यान ईरान के परमाणु सफर और उसके अंतरराष्ट्रीय कानूनी पहलुओं पर ही केंद्रित रहा। इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी के लिए आप USUN Official Remarks पर जा सकते हैं और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी Procedural Vote Details पर देख सकते हैं।

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