रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को बताया भयानक एडवेंचर, पुतिन ने की तेहरान की मदद.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर रूस ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे एक भयानक एडवेंचर करार दिया है। 2 सितंबर 2026 को रूस ने आधिकारिक रूप से दोनों देशों के बीच जारी सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष की निंदा की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है और आम लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा हो रही हैं।
पुतिन और पेजेश्कियन की मुलाकात
किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान 1 सितंबर 2026 को रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने तेहरान को हरसंभव समर्थन देने का वादा किया। उन्होंने ईरान को जरूरी सामान देने और हॉर्मूज जलडमरूमध्य के तनाव से निपटने में मदद करने का भरोसा दिलाया। राष्ट्रपति पुतिन ने जून महीने में हुए 60 दिनों के समझौते को अस्थिर और बेहद कमजोर बताया।
ईरान और रूस के बीच रणनीतिक रिश्ते
ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने रूस के समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया और तेहरान-मॉस्को के रिश्तों को रणनीतिक बताया। पेजेश्कियन ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने और प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका जून के समझौते का पालन करता है तो ईरान बातचीत के लिए तैयार है। एससीओ के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर उन एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया जिनसे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंध
हाल ही में अमेरिकी हमलों के बाद मध्य पूर्व में हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। अमेरिकी हमलों में ईरान के रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया गया था जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन और अन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने ईरान को पूरी तरह आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकस्ट' अभियान की घोषणा की है। साथ ही उन देशों को भी कड़ी चेतावनी दी गई है जो ईरान की मदद कर रहे हैं।
रूस की कथित गुप्त मदद और आगे के हालात
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस साल 2023 से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें विकसित करने में गुप्त रूप से मदद कर रहा है। इस कार्यक्रम का कोडनेम C430L है जिसमें मॉस्को से तेहरान को सैन्य तकनीक ट्रांसफर किए जाने की बात कही गई है। हालांकि रूसी विदेश नीति के जानकार Mark N. Katz का कहना है कि मॉस्को खाड़ी के अन्य देशों से अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता है इसलिए वह सीधे तौर पर ज्यादा सैन्य मदद देने से बचेगा।