यूरोप में मचा हड़कंप, रूस की 210 अरब यूरो संपत्ति के इस्तेमाल पर चार देशों ने की नई मांग.

यूक्रेन को लंबे समय तक आर्थिक मदद देने के लिए यूरोपीय संघ में रूस की फ्रीज की गई संपत्तियों के इस्तेमाल का मुद्दा एक बार फिर से गर्मा गया है। नीदरलैंड्स, पोलैंड, स्पेन और स्वीडन के मंत्रियों ने मिलकर इस मामले पर दोबारा विचार करने की पुरजोर मांग उठाई है। इन देशों का साफ कहना है कि रूस की तरफ से यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के कोई भी साफ संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते अब कीव को बहुत जल्द अतिरिक्त वित्तीय सहायता की सख्त जरूरत पड़ने वाली है।
यूरोपीय संघ के प्रमुखों को लिखा गया पत्र
चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने मिलकर यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास और आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएंटी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। आपको बता दें कि इस समय आयरलैंड के पास यूरोपीय संघ की घूर्णन अध्यक्षता है। भेजे गए पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि पिछले साल दिसंबर के महीने में यूरोपीय संघ ने साल 2026 और 2027 के दौरान यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के ऋण पर सहमति जताई थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह मदद बिल्कुल भी पर्याप्त साबित नहीं होगी।
रूस की संपत्ति और पुराना इतिहास
जब फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, उसके तुरंत बाद ही यूरोपीय संघ के तमाम देशों ने मिलकर रूसी केंद्रीय बैंक की लगभग 210 अरब यूरो की संपत्तियों को फ्रीज कर दिया था। इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 185 अरब यूरो की संपत्तियां ब्रुसेल्स में मौजूद केंद्रीय प्रतिभूति डिपॉजिटरी यूरोक्लियर के पास सुरक्षित रखी हुई हैं। यूरोपीय आयोग ने पिछले साल इन जमी हुई संपत्तियों का इस्तेमाल करके यूक्रेन को 165 अरब यूरो तक का लोन देने का एक बड़ा प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें नियम यह था कि यह पैसा तभी वापस किया जाएगा जब रूस खुद यूक्रेन को युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा देगा।
क्यों रुका था पिछला प्रस्ताव
हालांकि इस पूरे प्रस्ताव पर बेल्जियम ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसका कड़ा विरोध किया था। बेल्जियम का सीधा तर्क यह था कि इस योजना के अंदर रूस की तरफ से भविष्य में आने वाले संभावित मुकदमों और हर्जाने के दावों से निपटने के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा या गारंटी नहीं दी गई है। इसी कानूनी पेंच के कारण उस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया गया था और उसकी जगह पर यूरोपीय संघ के बजट के सहारे 90 अरब यूरो के ऋण की दूसरी व्यवस्था की गई थी। अब इन चार देशों की नई मांग के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 01 और 02 सितंबर को आयरलैंड में होने वाली यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस पुराने और संवेदनशील मुद्दे पर क्या नया फैसला लिया जाता है।