रूस का नया डैन-टी ड्रोन, युद्ध के मैदान में सैकड़ों बार हुआ पास, दुश्मन की रडार भी फेल.

मॉस्को से सामने आई एक बड़ी खबर के अनुसार रूस के नए हथियार डैन-टी ड्रोन ने जंग के मैदान में अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। इस आधुनिक हथियार के जरिए विशेष सैन्य अभियान के दौरान सैकड़ों युद्धक प्रक्षेपण सफलता के साथ पूरे किए जा चुके हैं। रूसी रक्षा क्षेत्र से जुड़ी सरकारी कंपनी रोस्टेक के एक बड़े अधिकारी ने इस बात की जानकारी दुनिया के सामने रखी है और बताया है कि यह ड्रोन अपनी उच्च प्रभावशीलता लगातार साबित कर रहा है।
मिस्र के एयर शो में हुआ था पहली बार पेश
इस खतरनाक और आधुनिक ड्रोन को दुनिया के सामने लाने के लिए मिस्र का मंच चुना गया था। जानकारी के मुताबिक 8 से 10 सितंबर 2026 तक मिस्र के एल अलामीन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर एक बड़ा एयर शो आयोजित हुआ था जिसका नाम एल अलामीन अंतरराष्ट्रीय एयर शो-2026 था। इसी कार्यक्रम के दौरान रूस ने पहली बार इस तकनीक को आधिकारिक तौर पर प्रदर्शित किया था, जिसके बाद से ही रक्षा जगत में इसकी चर्चा लगातार बनी हुई है।
रोस्टेक के आयुध, गोला-बारूद एवं विशेष रसायन क्लस्टर के औद्योगिक निदेशक तथा रूसी इंजीनियरिंग यूनियन के ब्यूरो सदस्य बेखान ओजदोएव ने इस संबंध में मीडिया को विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस ड्रोन का असल जंग के मैदान यानी विशेष सैन्य अभियान क्षेत्र में कड़ा परीक्षण किया जा चुका है। वास्तविक और कठिन परिस्थितियों के बीच इसके सैकड़ों बार सफल प्रक्षेपण किए गए हैं और इसकी मारक क्षमता तथा उपयोगिता बहुत ज्यादा असरदार पाई गई है।
दुश्मन की हर चाल को नाकाम करने की ताकत
अधिकारियों ने बताया कि यह नया ड्रोन किसी भी बाहरी सहारे के बिना पूरी तरह से स्वायत्त तरीके से काम करता है। इसका मतलब यह है कि यह बिना किसी रुकावट के अपने तय किए गए लक्ष्य तक खुद-ब-खुद पहुंच जाता है। इसके रास्ते में चाहे दुश्मन का इलेक्ट्रॉनिक युद्ध हो या फिर मजबूत वायु रक्षा प्रणालियों का भारी प्रतिरोध हो, यह हर सुरक्षा घेरे को पार करने की पूरी क्षमता रखता है।
इस ड्रोन की खास नेविगेशन और नियंत्रण प्रणाली इसे बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की अनुमति देती है। इसके अलावा यह रास्ते में आने वाली बड़ी-बड़ी पहाड़ियों, घने जंगलों और इंसानी इमारतों जैसी तमाम बाधाओं से बहुत आसानी से बच निकलता है। इसके बनावट में ऐसे कम दृश्यता वाले तत्वों का इस्तेमाल किया गया है जिससे यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम की पकड़ में बहुत मुश्किल से आता है। इसका विद्युत चुंबकीय सिग्नल बिखराव क्षेत्र भी बेहद कम है, जो इसे और ज्यादा सुरक्षित बनाता है।