रूस ने फिर दिखाई अपनी सैन्य ताकत, इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का किया सफल परीक्षण.

दुनिया भर में अपनी सैन्य ताकत को एक बार फिर से मजबूत करते हुए रूस ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रूस की सेना ने हाल ही में एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण किया है, जिससे देश की ताकत में और ज्यादा इजाफा हुआ है। इस नए परीक्षण के बाद से वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और रक्षा मामलों को लेकर चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं, क्योंकि रूस लगातार अपनी सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने में लगा हुआ है। आम लोगों और पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि इस तरह के परीक्षण देशों के बीच शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए किए जाते हैं।
कहाँ से लॉन्च हुई यह मिसाइल और क्या थे इसके लक्ष्य
मिली जानकारी के अनुसार, इस मिसाइल को उत्तर-पश्चिमी अर्खांगेल्स्क क्षेत्र में स्थित प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। लॉन्च किए जाने के बाद इस मिसाइल का टेस्ट वॉरहेड देश के बिल्कुल सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप की कुरा ट्रेनिंग रेंज तक पहुँचा। रूस के अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (RT) ने देश के रक्षा मंत्रालय के हवाले से शुक्रवार को यह आधिकारिक बयान जारी किया है। मंत्रालय का यह कहना है कि परीक्षण के दौरान जितने भी लक्ष्य और कार्य तय किए गए थे, वे सभी पूरी तरह से हासिल कर लिए गए हैं।
मिसाइल की तकनीकी विशेषताएँ और मोबाइल लॉन्च सिस्टम
रूस के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में इस बात की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है कि परीक्षण में इस्तेमाल की गई इस मिसाइल का सटीक नाम क्या है। हालांकि, मंत्रालय ने इतना जरूर साफ किया है कि यह एक मोबाइल-लॉन्च सॉलिड-फ्यूल सिस्टम है, जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। यह पूरा परीक्षण रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स की एक नियमित ट्रेनिंग एक्सरसाइज यानी अभ्यास का बहुत बड़ा हिस्सा था। इस अभ्यास के दौरान एक मोबाइल आईसीबीएम लॉन्च बैटरी को एक दूरदराज के वीरान इलाके में तैनात किया गया था, जिसके बाद मिसाइल को लॉन्च करने की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही सावधानी के साथ अंजाम दिया गया। मंत्रालय के अनुसार इस परीक्षण से मिसाइल की तकनीकी क्षमता और उसकी उड़ान संबंधी सभी विशेषताओं की पूरी पुष्टि हो चुकी है।
आरएस-28 सरमत मिसाइल और हाइपरसोनिक तकनीक का जिक्र
रूस पहले भी अपनी बेहद अत्याधुनिक और खतरनाक मानी जाने वाली आरएस-28 सरमत (RS-28 Sarmat) आईसीबीएम का परीक्षण कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरमत मिसाइल कई री-एंट्री व्हीकल्स के जरिए भारी परमाणु वॉरहेड को ले जाने में पूरी तरह से सक्षम है। इसे रूस की रणनीतिक परमाणु क्षमता का एक बहुत ही अहम हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा, रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सरमत के साथ हाइपरसोनिक ग्लाइडर तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इस तरह की आधुनिक तकनीक से लैस वॉरहेड बहुत ही तेज गति से अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ता है और सामने वाले देश के एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से चकमा देने के लिए अपनी दिशा में तुरंत बदलाव कर सकता है।
राष्ट्रपति पुतिन और सैन्य कमांडर का बयान
रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स के कमांडर जनरल सर्गेई काराकाएव ने यह बात कही है कि रूसी सेना इस साल के अंत तक अपनी पहली मिसाइल रेजिमेंट को नए हथियार सिस्टम से लैस करने की पूरी तैयारी कर रही है। देश के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी पहले आरएस-28 सरमत को रूस का बहुत ही शक्तिशाली मिसाइल सिस्टम बता चुके हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने यह दावा किया था कि यह मिसाइल बहुत बड़ी मात्रा में पेलोड ले जाने की क्षमता रखती है और इसकी लंबी दूरी रूस की रणनीतिक ताकत को और ज्यादा मजबूत बनाती है। पुतिन के अनुसार, रूस ने अपनी मिसाइल क्षमताओं के विकास पर इसलिए ज्यादा जोर दिया है क्योंकि मॉस्को को बदलते हुए वैश्विक सुरक्षा माहौल में अपनी रणनीतिक सुरक्षा को खुद सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस हुई थी। उन्होंने इन सभी प्रयासों को दुनिया में रणनीतिक शक्ति का संतुलन बनाए रखने से जोड़ा है।