रूस-यूक्रेन युद्धविराम के लिए भारत की पहल, कीव ने प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक

Gautam Sahu3 October 20262 min read0 viewsWorld
रूस-यूक्रेन युद्धविराम के लिए भारत की पहल, कीव ने प्रस्ताव को बताया सबसे व्यापक

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को थमाने के लिए भारत की कूटनीतिक कोशिशों को एक बड़ी सफलता मिली है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति स्थापित करने की दिशा में भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए यूक्रेन ने एक अहम बयान दिया है। यूक्रेनी पक्ष ने माना है कि उन्हें कई देशों से युद्धविराम के प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक और असरदार है।

विभिन्न देशों के प्रस्ताव और भारत की अनूठी पहल

कीव को हाल ही में संभावित युद्धविराम को लेकर भारत के अलावा तुर्किये, मिस्र और अमेरिका जैसे देशों से अलग-अलग प्रारूप मिले हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने पत्रकारों से बातचीत में इन प्रस्तावों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन संघर्ष को रोकने के लिए विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है, लेकिन कीव की कुछ बुनियादी मांगें भी हैं।

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यूक्रेन का मानना है कि किसी भी स्थायी समझौते में केवल सैन्य गतिविधियों पर रोक लगाना ही काफी नहीं है। इसमें देश के ऊर्जा संसाधनों और बंदरगाहों से जुड़े महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना तथा काला सागर की सुरक्षा भी शामिल होनी चाहिए।

क्यों खास है भारत का प्रस्ताव?

यूक्रेनी विदेश मंत्री के मुताबिक, तुर्किये और मिस्र ने मुख्य रूप से काला सागर में युद्धविराम का सुझाव दिया है, ताकि यूक्रेनी अनाज के निर्यात के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग तैयार किए जा सकें। वहीं, अमेरिकी प्रस्ताव का मुख्य केंद्र ऊर्जा ढांचे पर होने वाले हमलों को रोकना है।

इन सबके बीच, भारत का प्रस्ताव सबसे अलग और व्यापक साबित हुआ है। भारतीय प्रस्ताव में ऊर्जा सुरक्षा और काला सागर से जुड़े मोर्चों पर युद्धविराम को एक साथ शामिल किया गया है। यही वजह है कि कीव इस संयुक्त और समग्र प्रारूप पर विचार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आगे की राह

यूक्रेन ने यह भी संकेत दिया है कि वह संपर्क रेखा पर एक व्यापक और बिना शर्त युद्धविराम के विकल्प पर भी विचार कर सकता है। हालांकि, किसी भी शांति समझौते को धरातल पर उतारने के लिए रूस की सहमति और आगे की उच्चस्तरीय बातचीत बेहद जरूरी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में भारत की कूटनीति ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

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