सऊदी अरब के ठिकानों पर हूती हमलों में रूसी सैटेलाइट की मदद, जांच में खुलासा

जांच में खुलासा हुआ है कि रूसी सैटेलाइट्स हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर सटीक हमले करने के लिए डेटा दे रहे हैं।

Mohd. Irfan31 October 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब के ठिकानों पर हूती हमलों में रूसी सैटेलाइट की मदद, जांच में खुलासा

रियाद: सऊदी अरब के सैन्य और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हूती हमलों के पीछे रूसी सैटेलाइट खुफिया जानकारी के होने का दावा किया गया है। जिनेवा स्थित फर्म AURORAH Geosignal Intelligence की एक जांच में सामने आया है कि रूस के सैटेलाइट्स यमन के हूती विद्रोहियों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए महत्वपूर्ण डेटा मुहैया करा रहे हैं।

इस अध्ययन में 1 जुलाई से 19 अक्टूबर 2026 के बीच हुए 40 हमलों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सैन्य सैटेलाइट की गतिविधि और हमलों के समय व स्थान के बीच '100 प्रतिशत मेल' पाया गया है। इन हमलों के निशाने पर ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन, ताइफ का किंग फहद एयर बेस और प्रिंस सुल्तान एयर बेस जैसे ठिकाने रहे हैं।

डेटा से पता चला है कि हमलों से पहले और बाद के 72 घंटों के दौरान टारगेट एरिया के ऊपर से रूसी सैटेलाइट्स के गुजरने की संख्या में जुलाई 2026 के मुकाबले 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। AURORAH के संस्थापक नवाफ ओबैद ने बताया कि इन हमलों की सटीकता के लिए ऐसी विशेष खुफिया मदद की जरूरत होती है, जो हूतियों या उनके ईरानी सहयोगियों की अपनी क्षमता से बाहर है।

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एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में हूती प्रतिनिधि ने पुष्टि की है कि यमन में मौजूद ईरानी सलाहकार रूसी सैटेलाइट से मिली टारगेट जानकारी को आगे पहुंचाकर इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। वहीं, सऊदी अरब के पब्लिक डिप्लोमेसी के डिप्टी विदेश मंत्री रायेद क्रिमली ने स्वीकार किया कि रियाद रूस और चीन की सरकारों के साथ वहां के कुछ तत्वों से होने वाले खुफिया डेटा लीक के मुद्दे पर नियमित चर्चा कर रहा है।

यह पूरा मामला उस समय सामने आया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। फरवरी 2026 में हुए हमलों में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद से यह संघर्ष और बढ़ गया था। हालांकि जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था, लेकिन इराक, लेबनान और यमन के प्रॉक्सी समूहों के जरिए हिंसा जारी है।

इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट ने भी इन रिपोर्टों की पुष्टि की है कि रूस वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बाधित करने के लिए हूती ऑपरेशंस का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहा है। इस बीच, रूसी अधिकारियों ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 31 अक्टूबर 2026 तक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सऊदी गठबंधन बलों ने रियाद की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोकने की सूचना दी है।

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