संयुक्त राष्ट्र में एस जयशंकर की दो टूक, कहा- समुद्र में नाविकों पर हमले किसी हाल में बर्दाश्त नहीं

विदेश मंत्री S Jaishankar ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA के मंच से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दुनिया भर के देशों को साफ शब्दों में बता दिया है कि समंदर में कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी सही नहीं है। अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गल्फ यानी खाड़ी देशों के साथ-साथ रेड सी और ब्लैक सी जैसे समुद्री इलाकों में लगातार हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्री ने बताया कि इन खतरनाक हमलों में कई भारतीय नाविकों समेत दूसरे देशों के लोगों ने भी अपनी जान गंवाई है।
समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि जमीन पर चल रही पुरानी परेशानियों के अलावा अब समुद्र के रास्ते में भी नई और बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। भारत सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर लाइबेरिया और अन्य 23 देशों के साथ मिलकर एक खास पहल की शुरुआत की है। इस मुहिम का मकसद इन हमलों के खिलाफ दुनिया भर में एक मजबूत जनमत तैयार करना है ताकि इन पर रोक लगाई जा सके। भारत का यह मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलमार्गों पर सफर कर रहे नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। इसके लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पूरी सख्ती से पालन करना होगा।
खाड़ी देशों के संघर्ष पर चिंता और शांति की अपील
S Jaishankar ने मौजूदा समय में खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के टकराव से पहले से ही बिगड़े हुए हालात और ज्यादा खराब हो रहे हैं। भारत लगातार बढ़ रहे तनाव को लेकर अपनी गहरी चिंता जाहिर करता है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की है कि वे संयम बरतें, तनाव को कम करने की दिशा में काम करें और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से ऊर्जा और व्यापार की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए ताकि आम जनजीवन पर इसका बुरा असर न पड़े।
ग्लोबल साउथ के विकास में भारत की बड़ी भूमिका
संयुक्त राष्ट्र के इस बड़े मंच से विदेश मंत्री ने भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, तेज आर्थिक विकास और ग्लोबल साउथ के साथ विकास की साझेदारियों के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दुनिया भर के 78 देशों में चल रही 600 बड़ी विकास परियोजनाएं हैं। ये प्रोजेक्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और खेती जैसे तमाम अहम सेक्टरों से जुड़े हुए हैं जो लोगों के जीवन को बेहतर बना रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भारत का डिजिटल सिस्टम न सिर्फ देश के भीतर बेहतर शासन दे रहा है बल्कि सामाजिक और आर्थिक फायदों को आम जनता तक पहुंचाने का मुख्य जरिया भी बन चुका है। देश के अंदर बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है। कारोबार करने में आसानी, जीने का आसान तरीका और स्टार्टअप की संस्कृति ने भारत की आर्थिक कहानी को एक नई मजबूती दी है। भारत अपनी तरक्की के साथ-साथ अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को भी अच्छी तरह समझता है और अपने अनुभवों को दूसरे देशों के साथ बांटने के लिए हमेशा तैयार रहता है।