संयुक्त राष्ट्र में उठा पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का मुद्दा, जबरन धर्म परिवर्तन पर जताई चिंता

जेनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान संभली ट्रस्ट ने पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस दौरान विशेष रूप से उन महिलाओं और युवा लड़कियों का मुद्दा उठाया गया जो जबरन धर्मांतरण और जबरन शादी जैसी अमानवीय और कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही हैं। ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने वैश्विक मंच पर इन मामलों को प्रमुखता से रखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस संवेदनशील विषय की ओर आकर्षित किया है और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।
जैसलमेर के हिंदू परिवारों का उदाहरण दिया
परिषद के समक्ष सामान्य बहस के दौरान जनरल डिबेट के आइटम 4 के तहत बोलते हुए संभली ट्रस्ट के गोविंद सिंह राठौर ने राजस्थान के जैसलमेर में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यक परिवारों के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इनमें से कई परिवार मुख्य रूप से भील समुदाय से संबंध रखते हैं और पाकिस्तान में बेहद कठिन तथा खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद भारत में आकर बस गए हैं। इन समुदायों के साथ जमीन पर रहकर काम करने के अपने अनुभवों के आधार पर उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अल्पसंख्यकों की आवाज़ को सुनना और उनकी समस्याओं पर उचित ध्यान देना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि उन्हें सुरक्षा मिल सके।
गोविंद सिंह राठौर ने अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह किसी भी देश या वहां के आम नागरिकों के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह वहां की व्यवस्था से एक सीधी अपील है कि वह अपने देश के अल्पसंख्यकों की फरियाद को सुने। उन्होंने अप्रैल 2026 में संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों का हवाला भी दिया। इन आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान शादी के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार होने वाली महिलाओं और लड़कियों में से लगभग तीन-चौथाई हिंदू थीं, और इनमें से करीब चार में से पांच घटनाएं सिंध प्रांत में ही घटी थीं।
संस्थागत बदलाव और भारत में नई शुरुआत
इस संबोधन के दौरान पाकिस्तान में हुए कुछ प्रशासनिक बदलावों का भी जिक्र किया गया, जिसमें वर्ष 2025 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार आयोग की स्थापना शामिल है। इसके अलावा पाकिस्तान के अपने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जबरन विवाह और धर्मांतरण को लेकर जताई गई चिंताओं को भी स्वीकार किया गया। संभली ट्रस्ट की ओर से यह मांग की गई कि संबंधित संस्थान यह सुनिश्चित करें कि जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और युवा लड़कियों को ऐसी प्रथाओं से सुरक्षित रखा जाए।
इसके साथ ही उन परिवारों के जीवन पर भी प्रकाश डाला गया जो अब भारत में आकर अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत कर रहे हैं। संभली ट्रस्ट ने इन सभी परिवारों को पूरा समर्थन देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। ट्रस्ट के अधिकारियों ने कहा कि भारत में ये लोग एक बार फिर से अपनी जिंदगी को संवार रहे हैं और संस्था पूरी मजबूती के साथ इनके साथ खड़ी है। संभली ट्रस्ट पश्चिमी राजस्थान में वंचित महिलाओं, लड़कियों, बच्चों, लैंगिक अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर समुदायों के साथ जमीनी स्तर पर काम करने वाली एक प्रमुख संस्था है। यह संगठन शिक्षा, आजीविका, सशक्तिकरण, कानूनी सहायता और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में काम करता है ताकि समाज के इन वर्गों के लोग एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।