सना में हूती ठिकानों पर हवाई हमले, यमन में युद्ध फिर भड़का

Nura Basta11 October 20262 min read0 viewsYemen
सना में हूती ठिकानों पर हवाई हमले, यमन में युद्ध फिर भड़का

सना, यमन: यमन की राजधानी सना में हूती विद्रोहियों के सैन्य ठिकानों पर कई हवाई हमले किए गए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश भर में लड़ाई तेज़ होती जा रही है। सऊदी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये हमले 11 अक्टूबर 2026 को सामने आए।

संयुक्त राष्ट्र के यमन में विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने 9 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक तौर पर कहा कि यमन में हालात अब पूरी तरह युद्ध की ओर लौट चुके हैं। उसके बाद से ज़मीन पर और हवा में हमलों का सिलसिला और बढ़ गया है।

हूती समर्थक मीडिया के मुताबिक़ 11 अक्टूबर को अमरान प्रांत के हर्फ़ सुफ़यान ज़िले में लड़ाकू विमानों ने सात से आठ हवाई हमले किए। वहीं हूती नियंत्रित अल मसीरा टीवी ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को सऊदी अरब ने अलग-अलग प्रांतों में 77 हवाई हमले और मिसाइल हमले किए।

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गठबंधन का बड़ा अभियान और सना पर नज़र

ये हमले सऊदी अगुवाई वाले गठबंधन के उस बड़े अभियान का हिस्सा माने जा रहे हैं, जिसका मक़सद हूती सैन्य क्षमता को कमज़ोर करना है। गठबंधन का दावा है कि उसने हूती नियंत्रित इलाक़ों में 136 सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। इसी दौरान यमन की सरकारी सेनाएं 'ऑपरेशन डॉन ऑफ़ यमन' चला रही हैं, जिसका लक्ष्य सना को फिर से अपने नियंत्रण में लेना बताया जा रहा है। गठबंधन इस अभियान में उन्हें हवाई मदद दे रहा है।

दूसरी तरफ़ हूती सैन्य प्रवक्ता जनरल याहया सारी ने गठबंधन पर सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है और हाल के उन हमलों का ज़िक्र किया जो हूती मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी ठिकानों पर किए गए थे, जिनमें रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम भी शामिल है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालिकी का कहना है कि उनके सभी अभियान केवल वैध हूती सैन्य ठिकानों के खिलाफ़ हैं।

इन हमलों के बीच आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार पिछले कुछ हफ़्तों की तेज़ लड़ाई से दो लाख से ज़्यादा लोग अपने घर छोड़कर विस्थापित हो चुके हैं। सना और आसपास के इलाक़ों में रहने वाले परिवारों के लिए आने वाले दिन और मुश्किल हो सकते हैं, क्योंकि राहत और सुरक्षा दोनों पर अनिश्चितता बनी हुई है।

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