सऊदी अरब में अकाउंटिंग प्रोफेशन के लिए सौदीकरण कोटा बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा, नियम न मानने पर लगेगा भारी जुर्माना

सऊदी अरब में 27 अक्टूबर 2026 से अकाउंटिंग प्रोफेशन के लिए सौदीकरण कोटा बढ़ाकर 50% किया जाएगा। नियम न मानने पर भारी जुर्माना लगेगा।

Mohd. Irfan24 October 20262 min read0 viewsSaudi
सऊदी अरब में अकाउंटिंग प्रोफेशन के लिए सौदीकरण कोटा बढ़ाकर 50 फीसदी किया जाएगा, नियम न मानने पर लगेगा भारी जुर्माना

रियाद: सऊदी अरब सरकार ने अकाउंटिंग प्रोफेशन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार 27 अक्टूबर 2026 से इस क्षेत्र में सौदीकरण दर को बढ़ाकर 50 फीसदी करने जा रही है। यह कदम देश की बहु-वर्षीय लोकलाइजेशन रणनीति का हिस्सा है।

इससे पहले 27 अक्टूबर 2025 को इस कोटा को 40 फीसदी किया गया था। सरकार की योजना इसे और आगे बढ़ाने की है, जिसके तहत 27 अक्टूबर 2027 तक इसे 60 फीसदी और 27 अक्टूबर 2028 तक 70 फीसदी तक ले जाया जाएगा।

मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय (HRSD) और वाणिज्य मंत्रालय द्वारा संचालित ये नियम उन निजी संस्थानों पर लागू होंगे जिनमें पांच या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। यह नियम 44 निर्धारित अकाउंटिंग प्रोफेशन पर लागू होगा, हालांकि लाइसेंस प्राप्त अकाउंटिंग ऑफिस को एक अलग ढांचे के तहत इससे छूट दी गई है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

कोटा में शामिल होने के लिए सऊदी नागरिकों के पास सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट्स (SOCPA) का पेशेवर प्रमाणन होना जरूरी है। साथ ही वेतन की भी शर्त रखी गई है, जिसमें बैचलर डिग्री धारकों के लिए न्यूनतम वेतन 6,000 रियाल और डिप्लोमा धारकों के लिए 4,500 रियाल प्रति माह तय किया गया है।

नियमों के मुताबिक, कोटा की गणना राउंडिंग के आधार पर होगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी फर्म में 23 अकाउंटिंग पद हैं, तो 50 फीसदी की शर्त पूरी करने के लिए उसे 12 सऊदी नागरिकों को नियुक्त करना होगा।

गैर-सऊदी अकाउंटेंट्स पर फिलहाल कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी 2028 तक 50 फीसदी से घटकर 30 फीसदी रह जाएगी। मंत्रालय ने CFOs को सलाह दी है कि वे रोजगार शीर्षकों का मिलान GOSI रिकॉर्ड से करें और सटीक पेरोल डेटा सुनिश्चित करें।

नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर हर उल्लंघन के लिए 4,000 से 6,000 रियाल तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, ऐसी कंपनियों को 'रेड' निताकात बैंड में डाला जा सकता है, जिससे नए वर्क परमिट मिलने और मौजूदा इकामा के नवीनीकरण में दिक्कत आएगी। ऐसी कंपनियों को सरकारी सप्लायर डेटाबेस से भी हटाया जा सकता है।

मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि पदों के पुनर्वर्गीकरण के जरिए इन नियमों से बचने की कोशिश न करें, क्योंकि वर्कफोर्स लोकलाइजेशन के प्रयासों की कड़ी निगरानी की जा रही है।

Share:

Comments

Leave a comment