मक्का पर बड़ा ड्रोन हमला नाकाम, सऊदी एयर डिफेंस ने आसमान में ही किया तबाह.

सऊदी अरब की राजधानी रियाद और पवित्र शहर मक्का को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मंगलवार की देर रात यमन के ईरान समर्थित Houthi आतंकवादियों ने मक्का के पवित्र शहर की तरफ एक ड्रोन से हमला करने की कोशिश की थी। गनीमत यह रही कि सऊदी अरब की एयर डिफेंस फोर्स ने समय रहते इस मानवरहित विमान को शहर के दक्षिण में ही रोक लिया और हवा में ही पूरी तरह तबाह कर दिया। इस बड़ी कार्रवाई की वजह से ड्रोन ग्रैंड मस्जिद और काबा के ऊपर बने प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के अंदर नहीं घुस पाया और एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
अधिकारियों ने क्या कहा
गठबंधन के प्रवक्ता Major General Turki al-Maliki ने इस हमले को बेहद शर्मनाक हरकत करार दिया है। उनका कहना था कि यह हमला सिर्फ वहां आने वाले नमाजियों और श्रद्धालुओं में डर पैदा करने के लिए किया गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दो पवित्र मस्खों और लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा देश के लिए एक बहुत बड़ी रेड लाइन है जिसे कोई पार नहीं कर सकता है। इसके अलावा Organisation of Islamic Cooperation (OIC) ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे एक असहनीय उल्लंघन बताया है। आपको बता दें कि साल 2017 में जब हुती विद्रोहियों ने एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी, उसके बाद से मक्का के लिए यह पहला बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बीच में जेद्दा और ताफ में भी थोड़े समय के लिए ऐसे अलर्ट देखे गए थे।
Houthi गुट का बयान और पुरानी घटनाएं
दूसरी तरफ हुती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से झूठ और मनगढ़ंत कहानी बताया है। उनका दावा है कि उनके संगठन के ऑपरेशन सिर्फ तेल सुविधाओं और सैन्य अड्डों तक ही सीमित हैं। इसके अलावा हुती समूह ने यह भी दावा किया कि उन्होंने यमन की सीमा के अंदर सऊदी के एक F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है, हालांकि सऊदी सरकार या रियाद की तरफ से इस नुकसान की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस घटना से पहले लाल सागर के बंदरगाह और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास भी तनाव की खबरें आ चुकी हैं, जिससे तेल निर्यात के रास्ते प्रभावित हुए हैं। विद्रोही लगातार खमीस मुशैत स्थित किंग खालिद एयर बेस और दक्षिण के शहरों को निशाना बना रहे हैं, जिससे वहां के आम नागरिकों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
ऊर्जा बाजारों पर असर और आगे के कदम
इन सब के बीच पिछले शुक्रवार को एक और ड्रोन हमला देखने को मिला था, जिसके बारे में रियाद का कहना है कि यह इराक में मौजूद ईरान समर्थक समूहों द्वारा किया गया था। इस हमले की वजह से पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था। हालांकि अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने जानकारी दी है कि तेल का प्रवाह बहुत जल्द यानी अगले कुछ दिनों में फिर से सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा। दूसरी तरफ ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली योजनाबद्ध बातचीत को सऊदी अरब के अनुरोध पर फिलहाल टाल दिया गया है और बहरीन ने भी इसमें शामिल होने से मना कर दिया है। इन तमाम क्षेत्रीय तनावों के बीच सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और स्थिरता के लिए हर जरूरी और कड़ा कदम उठाएगा, जिसका असर गल्फ देशों के साथ-साथ दुनियाभर के ऊर्जा बाजारों पर भी साफ देखा जा रहा है।