सऊदी अरब पर हूती हमले की एर्दोगन ने की निंदा, 13 की मौत

अंकारा: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने 12 अक्टूबर 2026 को साफ कहा कि सऊदी अरब पर हो रहे हूती हमलों में उनका देश सऊदी अरब के साथ खड़ा है। कैबिनेट बैठक के बाद अंकारा से बोलते हुए उन्होंने इन हमलों को गैर-कानूनी और अमानवीय बताया। उसी दिन सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और एयरपोर्ट पर हमलों की खबर ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी।
12 अक्टूबर को हूती मिसाइलों और ड्रोन ने सऊदी अरब के दो बड़े हवाई अड्डों को निशाना बनाया। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अलावा दो अरामको सुविधाओं पर भी हमले हुए। सबसे भयावह तस्वीर किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आई, जहां हुए हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए।
सऊदी अधिकारियों ने यह जांच शुरू की है कि हवाई हमलों को रोकने वाली रक्षा प्रणाली में कहां चूक हुई। पिछले एक हफ्ते में सऊदी एयरपोर्ट पर हूती हमलों से कुल मौतों का आंकड़ा कम से कम 20 तक पहुंच गया है। इन मृतकों में एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है।
तुर्की और सऊदी के बीच रक्षा समझौते पर काम जारी
तुर्की की यह प्रतिक्रिया अकेली नहीं है। 11 अक्टूबर को तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान और सऊदी अरब के समूह 'आर4' ने संयुक्त बयान जारी कर हूती विद्रोही संगठन को नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे के नुकसान के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। बयान में इन हमलों की सख्त आलोचना की गई।
एर्दोगन ने यह भी बताया कि अगस्त 2026 में हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' को तुर्की की संसद से मंजूरी दिलाने का काम चल रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने 8 अक्टूबर को कहा था कि अंकारा सऊदी अरब को तकनीकी और वायु रक्षा सहायता देने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इसमें यमन में आक्रामक अभियान के लिए सैनिक भेजना शामिल नहीं है।
तुर्की के विदेश मंत्रालय ने भी औपचारिक बयान जारी कर सऊदी अरब के प्रति एकजुटता जताई और तत्काल युद्धविराम की मांग की। एयरपोर्ट जैसे आम नागरिकों से जुड़े ठिकानों पर हमले से हवाई यात्रा करने वाले प्रवासी भारतीयों और खाड़ी में काम करने वाले लाखों लोगों की चिंता भी बढ़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्षेत्र में तनाव कितना थमता है।