सऊदी अरब और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत, मध्य पूर्व में तनाव कम करने पर हुई चर्चा

सऊदी अरब और यूनाइटेड किंगडम के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर एक महत्वपूर्ण फोन पर बातचीत हुई है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद और यूनाइटेड किंगडम के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने आपसी बातचीत के दौरान मध्य प्रदेश में चल रहे तनाव को कम करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। इस बात की जानकारी सऊदी विदेश मंत्रालय की तरफ से दी गई है, जिसमें बताया गया कि दोनों नेताओं ने कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर चर्चा
बातचीत के दौरान दोनों शीर्ष अधिकारियों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और हालिया अंतरराष्ट्रीय विकासक्रमों का जायजा लिया। नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा करना बेहद जरूरी है। समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार स्थिरता को सुरक्षित रखा जा सकता है। गल्फ देशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने वाले लोगों के लिए यह समुद्री सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है, जिससे भारत और खाड़ी देशों के बीच होने वाला कारोबार भी प्रभावित नहीं होता है।
यमन से होने वाले हमलों की निंदा और कूटनीतिक कदम
जुलाई 2026 में अपना पद संभालने वाले यूके के विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने यमन में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों पर किए जाने वाले हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस दौरान सऊदी अरब के प्रति यूके की एकजुटता को फिर से दोहराया। यह फोन कॉल सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल द्वारा 6 सितंबर 2026 को अपने ईरानी और पाकिस्तानी समकक्षों के साथ क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर की गई अलग-अलग बैठकों के बाद सामने आई है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप यूके सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
ब्रिटिश सरकार की तरफ से भी लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में सचिव मिलिबैंड ने गाजा के संकट पर अधिक निर्णायक कार्रवाई करने की सार्वजनिक अपील की है और साथ ही फिलिस्तीनी राज्य के भविष्य पर बस्तियों के विस्तार के प्रभाव को लेकर चेतावनी भी जारी की है। इन सभी बैठकों और वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य यही है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो सके और आम नागरिकों के साथ-साथ प्रवासियों का जीवन भी सुरक्षित रहे।