सऊदी अरब पर हouthi विद्रोहियों का हमला, संयुक्त राष्ट्र ने की निंदा और तुर्की-पाकिस्तान ने मिलाया हाथ.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UN Security Council ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किए गए लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। शुक्रवार को फ्रांसीसी दूत जेरोम बोन्नाफंट द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में परिषद के सभी 15 सदस्यों ने नागरिकों और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाए जाने वाले इन हमलों पर गहरी चिंता जताई। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों के घायल होने की खबर सामने आई है जिसके बाद परिषद ने सैन्य तनाव को तुरंत रोकने की मांग की और सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा समर्थन किया है। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले आम नागरिकों और प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर वे लोग जो ऊर्जा क्षेत्र या निर्माण कार्य से जुड़े हैं।
सऊदी एयर डिफेंस ने रोकी मिसाइलें
बीते गुरुवार को सऊदी अरब की एयर डिफेंस प्रणाली ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ताइफ और रेड सी के पास स्थित यान्बु ऑयल पोर्ट की तरफ आ रही कुल 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। दूसरी तरफ हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने राजधानी रियाद और अरामको कंपनी की कई सुविधाओं को निशाना बनाते हुए दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। इस बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फवजान अल-फवजान ने देश की रक्षा के लिए एक बयान जारी किया। उन्होंने सीमा पर तैनात सैनिकों और गठबंधन बलों से देश की रक्षा करने की अपील की और हूती आंदोलन को एक बुराई का समूह बताया जिसका मकसद केवल अशांति फैलाना है। इन हमलों के कारण सऊदी अरब से होने वाले तेल निर्यात पर भी असर पड़ा है और लाल सागर के तटीय इलाकों में तनाव बना हुआ है।
तुर्की और पाकिस्तान के साथ नई रणनीतिक साझेदारी
क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तुर्की और पाकिस्तान के बड़े सैन्य अधिकारी आपातकालीन बैठकों के लिए रियाद पहुंचे। मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत हुई इस बैठक में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, जनरल सेलुक बायेraktaroglu और सऊदी जनरल फैयाज बिन हामिद अल-रुवैली ने हिस्सा लिया। इन तीनों देशों ने मिलकर खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य एकीकरण को बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके तहत एक नया पारस्परिक रक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया गया है जिसके अनुसार यदि इनमें से किसी भी एक देश पर हमला होता है तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते का सीधा असर यह होगा कि खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी हो जाएगी जिससे काम करने वाले विदेशी कामगारों और प्रवासियों को भी सुरक्षित माहौल मिलने की उम्मीद है।
तेल बाजार और क्षेत्रीय कूटनीति पर असर
यमन के लाल सागर तट पर हूती कब्जे और उसके बाद लगाए गए नाकेबंदी के कारण सऊदी तेल निर्यात पर दबाव लगातार बना हुआ है। इसके अलावा ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आ रही बाधाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अकेले सितंबर महीने में ही करीब 125,000 यमनी नागरिक अपने घरों से विस्थापित हुए हैं। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यह दावा किया है कि हूती विद्रोही पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करते हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और कई खाड़ी देश ईरान की पुरानी और प्रत्यक्ष मदद की ओर इशारा करते रहे हैं। बाब अल-मण्डब और हॉर्मुज जलमार्गों पर आवाजाही सीमित होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है और रिपोर्टों के अनुसार डोनाल्ड ट्रम्प ने तेहरान के सात दिवसीय हॉर्मुज प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। यह पूरी स्थिति तुर्की रक्षा मंत्रालय और रॉयटर के 25 सितंबर 2026 के हैंडआउट फोटोग्राफ में दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर गतिविधियां तेज रहेंगी।