Saudi Arabia News: सऊदी अरब ने की ईरान की मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा, जॉर्डन का किया पूरा समर्थन.

खाड़ी देशों में तनाव का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी बीच ईरान की हरकतों को लेकर सऊदी अरब ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सऊदी अरब ने जॉर्डन पर लगातार हो रहे ईरानी हमलों की आधिकारिक तौर पर निंदा की और अम्मान सरकार के साथ अपनी पूरी एकजुटता व्यक्त की है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी देशों के साथ रहने के नियमों के खिलाफ बताया है। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और भारत से आने-जाने वाले यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पिछले छह महीने से चल रहे इस संघर्ष का असर अब पूरे क्षेत्र पर साफ दिखाई दे रहा है।
जॉर्डन की सेना ने हवा में रोकीं मिसाइलें
जॉर्डन सशस्त्र बलों (JAF) की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी क्षेत्र से जॉर्डन की तरफ दागी गईं कुल 20 में से 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सिर्फ 2 मिसाइलें ही बिना आबादी वाले इलाकों में गिरीं, जिसकी वजह से किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अल-अजराक़ एयर बेस को निशाना बनाने वाला एक सुधारात्मक हमला बताया है। उनका दावा है कि इस कार्रवाई में बेस की कुछ सुविधाओं और फाइटर जेट शेल्टरों को नुकसान पहुंचा है। इस पूरी घटना की जानकारी WAM रिपोर्ट के जरिए सामने आई है।
अमेरिका और खाड़ी देशों का रुख
यह पूरा सैन्य तनाव अमेरिका द्वारा अपनाई गई दोहरी आर्थिक और सैन्य रणनीति के बाद और ज्यादा बढ़ गया है। इससे पहले मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने अमेरिकी युद्धपोतों पर हुए हमलों का जवाब देते हुए ईरान के 5 तेल टैंकरों को नष्ट कर दिया था। जॉर्डन की जमीन पर हुए इन मिसाइल हमलों ने इस बात को साबित कर दिया है कि यह विवाद अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्रीय एकजुटता दिखाते हुए बहरीन के शाही परिवार ने भी ईरान की इन कार्यवाहियों की कड़ी आलोचना की और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का स्पष्ट उल्लंघन करार दिया। सऊदी अरब और जॉर्डन के बीच के इस आपसी सहयोग से यह स्पष्ट होता है कि खाड़ी के देश किसी भी बाहरी आक्रामकता के खिलाफ एकजुट होकर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।