सऊदी अरब का कड़ा रुख, इसराइली प्रधानमंत्री के सीरियाई क्षेत्र में घुसने पर जताई कड़ी आपत्ति.

Aanya10 September 20262 min read29 viewsSaudi
सऊदी अरब का कड़ा रुख, इसराइली प्रधानमंत्री के सीरियाई क्षेत्र में घुसने पर जताई कड़ी आपत्ति.

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 10 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए इसराइली प्रधानमंत्री के सीरियाई अरब गणराज्य के क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने पर कड़ी निंदा की है। सऊदी सरकार ने इसे सीरिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का खुला उल्लंघन बताया है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ करार दिया है। इस पूरी घटना के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

सीरियाई जमीनों पर उल्लंघनों को रोकने की मांग

सऊदी अरब ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि सीरियाई जमीनों पर इस्राइल के दखल और उल्लंघनों को तुरंत रोका जाना चाहिए। देश की स्थिरता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए 1974 के डिसइंगेजमेंट ऑफ फोर्सेज समझौते का पूरी तरह से पालन करने की अपील की गई है। सऊदी अरब ने एक बार फिर सीरियाई क्षेत्र की एकता और संप्रभुता के प्रति अपना पूरा समर्थन दोहराया है।

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इसराइली नेताओं का सीरियाई बफर जोन का दौरा

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ और अन्य अधिकारियों के साथ बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सीरिया के अंदर एक बफर जोन में इसराइली सैनिकों से मिलने पहुंचे थे। इस दौरान नेतन्याहू ने दावा किया कि इस्राइल ने माउंट हर्मन से यर्मूक नदी तक के इलाके पर पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है। वहीं रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने यह भी घोषणा की कि इस्राइल माउंट हर्मन से अपने सैनिकों को वापस नहीं हटाएगा।

समझौते और बफर जोन का इतिहास

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1974 के डिसइंगेजमेंट ऑफ फोर्सेज समझौते के तहत गोलान हाइट्स पर इस्राइल और सीरियाई बलों को अलग करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक बफर जोन बनाया गया था। इस जोन में किसी भी तरह की सैन्य मौजूदगी पर पूरी तरह रोक थी। हालांकि, दिसंबर 2025 में पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के हटने के बाद इस्राइल ने अपनी सेना को इस बफर जोन के भीतर भेज दिया था, जिसके बाद से तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

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