Saudi Arabia News: सऊदी अरब ने यमन में पहली बार इस्तेमाल की चीनी मिसाइल, बीच रास्ते में हुई क्रैश.

Sushma Kumari15 September 20263 min read21 viewsSaudi
Saudi Arabia News: सऊदी अरब ने यमन में पहली बार इस्तेमाल की चीनी मिसाइल, बीच रास्ते में हुई क्रैश.

सऊदी अरब की सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर एक बड़ा हमला किया है। इस हमले में चीन में बनी DF-15A शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि पिछले करीब तीन दशकों में यह पहला मौका है जब सऊदी बलों ने युद्ध के मैदान में इस हथियार का इस्तेमाल किया है। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब सऊदी नीत गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच चल रहा संघर्ष पिछले एक महीने में काफी ज्यादा बढ़ गया है।

यमन के रेगवान जिले में मिला मलबा

सोमवार, 14 सितंबर 2026 को ओपन-सोर्स एनालिस्ट्स ने यमन के मा'रिब गवर्नरट के रेगवान जिले में एक मलबा देखा। जांच करने पर पता चला कि यह मलबा चीनी निर्मित DF-15A बैलिस्टिक मिसाइल के बूस्टर का है। यह खोज इस बात का पहला भौतिक प्रमाण देती है कि रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स इस रोड-मोबाइल सिस्टम का संचालन करती है। हालांकि, लॉन्च के बाद यह मिसाइल अपने तय निशाने पर नहीं लग पाई और रास्ते में ही किसी तकनीकी खराबी या स्टेज सेपरेशन के कारण टूटकर जमीन पर गिर गई।

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हूती विद्रोहियों के पास ऐसी किसी भी मिसाइल को हवा में ही रोकने यानी इंटरसेप्ट करने की क्षमता नहीं है। सऊदी अरब ने इन मिसाइलों को 1990 के दशक में चीन से खरीदा था। इतने सालों तक इन हथियारों को सऊदी सेना के पास संभाल कर रखा गया था, लेकिन पहले कभी इनका इस्तेमाल किसी सैन्य संघर्ष में नहीं किया गया था। इस मिसाइल के इस्तेमाल और पहचान को लेकर न तो सऊदी अरब, न चीन और न ही यमन के अधिकारियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। ओपन-सोर्स विशेषज्ञों ने मलबे की तस्वीरों की आपस में तुलना करके इस बात की पुष्टि की है।

सऊदी-हूती संघर्ष में भारी तनाव और हमले

मिसाइल के इस कथित इस्तेमाल से ठीक पहले सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच का संघर्ष बहुत ज्यादा भड़क उठा था। सोमवार, 14 सितंबर 2026 को हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी सऊदी अरब के खमीस मुशायत स्थित किंग खालिद एयर बेस और अन्य सैन्य ठिकानों पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से बड़ा हमला किया है। उनका कहना था कि यह कार्रवाई यमन में हुए सऊदी हवाई हमलों का बदला लेने के लिए की गई थी।

इसके जवाब में सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को यह पुष्टि की कि सोमवार को खमीस मुशायत, आभा और ताइफ शहरों को निशाना बनाकर कई हमले किए गए थे। इन हमलों की वजह से 13 नागरिक घायल हो गए और सात घरों तथा दो गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा। इसी दिन यमन के पश्चिमी हिस्से में हुए एक हूती हमले में सरकार के आठ सैनिक भी मारे गए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब ने चेतावनी दी कि वह इन हमलों का बहुत कड़ा जवाब देगा। इसके बाद रियाद के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती ठिकानों पर 50 से ज्यादा हवाई हमले किए। वहीं मंगलवार, 15 सितंबर 2026 की सुबह सऊदी सिविल डिफेंस ने छह अलग-अलग क्षेत्रों में एयर-रेड का अलर्ट जारी किया था, जिसे बाद में हालात सामान्य होने पर हटा लिया गया। सऊदी अरब और चीन के बीच हथियारों के आदान-प्रदान का पुराना इतिहास रहा है, जिसमें 1980 के दशक के अंत में DF-3A मिसाइलें और लगभग 2007 में DF-21 मिसाइलों की खरीद शामिल है।

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