सऊदी अरब पर बड़ा ड्रोन हमला, ईस्ट-वेस्ट क्रूड पाइपलाइन बंद होने से दुनिया भर में मची हलचल.

सऊदी अरब में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी घटना सामने आई है जहाँ ड्रोन हमलों के बाद देश की महत्वपूर्ण 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट क्रूड पाइपलाइन को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल देखा गया और ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग 110 डॉलर के करीब पहुँच गईं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी देशों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम जनता तथा कामगारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी होती जा रही हैं। इस पूरी स्थिति का असर भारत और अन्य देशों से खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ सकता है जो रोजगार के लिए इन देशों में रहते हैं।
पंपिंग स्टेशनों पर हुआ हमला
रियाद और मदीना क्षेत्रों में स्थित पंपिंग स्टेशनों को ड्रोन्स के जरिए निशाना बनाया गया जिन्हें कथित तौर पर इराक से लॉन्च किया गया था। इस हमले में कुछ कर्मचारी घायल हुए और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में रेगिस्तान के ऊपर काले धुएँ के गुबार साफ देखे गए। घटना से पहले इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 4 से 5 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता था जो वैश्विक आपूर्ति का 4 से 5 प्रतिशत हिस्सा था। यह पाइपलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य का एक प्रमुख विकल्प मानी जाती है जिसके बंद होने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई है।
पेरिम द्वीप पर कब्जा और क्षेत्रीय तनाव
इसी दौरान ईरान समर्थित हूती बलों ने बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में स्थित पेरिम द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है जिसे मयुन के नाम से भी जाना जाता है। मोचा बंदरगाह पर कब्जे के बाद इन बलों ने हानिश द्वीपों और मुख्य भूमि के धुआब शहर की ओर भी आगे बढ़ना शुरू कर दिया जिसके चलते सऊदी समर्थित इकाइयों को पीछे हटना पड़ा। हूती प्रवक्ताओं ने बयान दिया है कि सऊदी जहाजों को छोड़कर बाकी समुद्री यातायात पूरी तरह सुरक्षित है। इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जादी के कार्यालय ने पुष्टि की कि हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन इराक से आए थे और इसके बाद उन्होंने मयसान प्रांत के जिम्मेदार कमांडर को बर्खास्त कर दिया। साथ ही, उन्होंने सऊदी अरब से किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई से बचने की अपील की है। बहरीन, कतार, जॉर्डन और जीसीसी सचिवालय ने इस पाइपलाइन हमले की कड़ी निंदा की है।
राजनयिक बैठकें और कूटनीतिक प्रयास
बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ओमान आगामी 14 सितंबर को एक महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है जिसमें खाड़ी देशों के तटीय क्षेत्रों, ईरान और इराक के विदेश मंत्री समुद्री सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए एकत्र होंगे। इस बैठक में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा एक राज्य मंत्री के शामिल होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा छाया रहा जहाँ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, यूएई क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद और सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान उपस्थित थे। हालांकि, समुद्री सुरक्षा की भाषा को लेकर असहमतियों के कारण इस सम्मेलन में कोई संयुक्त घोषणा पत्र जारी नहीं हो सका।
अन्य क्षेत्रों में भी जारी हैं हमले
बीते कुछ दिनों में आभा, खमीस मुशाइत, जाज़ान और नज़रान में हूती हमलों की वजह से कुल 73 नागरिक घायल हुए हैं। इसके अलावा कतार के रास लाफन, बहरीन और कुवैत की सुविधाओं तथा ओमान के दुक्म क्षेत्र को भी हालिया हमलों का सामना करना पड़ा है जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इन घटनाओं के कारण खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों और सुरक्षा बलों के बीच सतर्कता बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन और सरकारें स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं ताकि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।