Saudi Arabia पर बड़ा हमला, ऊर्जा संयंत्रों को बनाया गया निशाना, खाड़ी देशों ने जताई कड़ी आपत्ति

सऊदी अरब में ऊर्जा संयंत्रों पर हुए हमलों को लेकर खाड़ी देशों में खलबली मच गई है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी GCC के महासचिव जसेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने 11 सितंबर 2026 को एक औपचारिक बयान जारी किया है। इस बयान में उन्होंने सऊदी अरब के अंदर जरूरी ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। आम आदमी और वहां काम करने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस तरह के हमलों से देश की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर बहुत बड़ा खतरा मंडराता है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय का बड़ा ऐलान और पाइपलाइन बंद
इस पूरे मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने 11 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से यह जानकारी दी कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है। यह फैसला 10 सितंबर 2026 को गुरुवार के दिन रियाद और मदीना क्षेत्रों में स्थित सुविधाओं पर हुए कई हमलों के बाद लिया गया। इन हमलों की वजह से कुछ लोगों के घायल होने की भी खबर सामने आई है, हालांकि घायलों की सटीक संख्या अभी तक आधिकारिक रूप से साझा नहीं की गई है। इस पाइपलाइन के बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है और वहां रहने वाले आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
इराक से आए थे ड्रोन और हूती विद्रोहियों का नाम आया सामने
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में यह बात सामने आई है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए गए ड्रोन पड़ोसी देश इराक के इलाके से आए थे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए GCC महासचिव अल-बुदैवी ने इराकी सरकार से कड़े कदम उठाने की अपील की है ताकि कोई भी देश अपनी जमीन का इस्तेमाल सऊदी अरब के खिलाफ हमलों के लिए न होने दे। इसके अलावा, 8 और 10 सितंबर 2026 को भी ऊर्जा संयंत्रों और दक्षिणी सऊदी शहरों पर कुछ हमले किए गए थे, जिनकी जिम्मेदारी हूती मिलिशिया पर डाली गई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों और आग का पता लगाने वाले डाटा से भी यह साफ हो गया है कि ईस्ट-वेस्ट क्रूड पाइपलाइन से जुड़े एक पंपिंग स्टेशन को इन हमलों में नुकसान पहुंचा है।