सऊदी अरब में विदेशी इंजीनियरों के लिए आधिकारिक सैलरी स्ट्रक्चर लागू, अब अनुभव और डिग्री के हिसाब से मिलेगा वेतन
सऊदी अरब सरकार ने विदेशी इंजीनियरों के लिए आधिकारिक सैलरी स्केल जारी किया है। जानें डिग्री और अनुभव के हिसाब से कितनी मिलेगी सैलरी।

रियाद: सऊदी अरब सरकार ने विदेशी इंजीनियरों के लिए एक आधिकारिक सैलरी स्केल जारी किया है। रॉयल डिक्री नंबर A/23 के तहत विनियमित यह पेरोल स्ट्रक्चर नए और पुराने दोनों तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सऊदी विजन 2030 से जुड़ी परियोजनाओं में काम कर रहे प्रवासियों के लिए वेतन में पारदर्शिता लाना है।
मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा जारी इस ढांचे में बैचलर, मास्टर और पीएचडी डिग्री धारकों के लिए बेसिक पे और अनुभव भत्ते तय किए गए हैं। अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, यह संरचना 1432 AH (लगभग 2011) के एक डिक्री से जुड़ी है। इसमें कर्मचारियों को 15 प्रतिशत कॉस्ट-ऑफ-लिविंग अलाउंस (COLA) भी दिया जाएगा।
सैलरी के आंकड़ों के मुताबिक, बैचलर डिग्री वाले इंजीनियरों की बेसिक सैलरी 6,900 सऊदी रियाल तय की गई है। इसके साथ ही उन्हें प्रति वर्ष 345 रियाल का अनुभव भत्ता मिलेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 15 साल है। इस तरह बैचलर डिग्री धारकों की अधिकतम कुल सैलरी 12,075 रियाल तक हो सकती है।
वहीं, पीएचडी डिग्री रखने वाले इंजीनियरों की शुरुआती बेसिक सैलरी 9,775 सऊदी रियाल होगी, जिन्हें प्रति वर्ष 490 रियाल का अनुभव भत्ता मिलेगा। मास्टर डिग्री धारकों के लिए बैचलर डिग्री वालों की तुलना में अधिक वेतन स्तर निर्धारित किया गया है।
मंत्रालय का यह कदम नियोक्ताओं और रिक्रूटमेंट एजेंसियों के लिए एक बेंचमार्क के रूप में काम करेगा, ताकि बाजार में मिलने वाले अलग-अलग ऑफर्स के बीच मुआवजे का मानकीकरण किया जा सके। जानकारों का कहना है कि इस पॉलिसी से भारतीय नागरिकों सहित अन्य विदेशी श्रमिकों को कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएट करने और कम वेतन मिलने से रोकने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इस पहल का लक्ष्य कुशल प्रतिभाओं को आकर्षित करना और विजन 2030 को समर्थन देना है, लेकिन सभी सेक्टरों में इसके सटीक क्रियान्वयन और महंगाई के हिसाब से भविष्य में होने वाले बदलावों को लेकर सवाल बने हुए हैं।