Saudi Arabia: मक्का और मदीना पर हमले को लेकर ग्रैंड मस्जिद के इमाम ने की कड़ी निंदा, सुरक्षा को बताया रेड लाइन।

25 सितंबर 2026 को ग्रैंड मस्जिद के इमाम शेख यासर अल-दोसारी ने सऊदी अरब और मक्का व मदीना के पवित्र स्थलों को निशाना बनाने वाले हालिया आक्रामक हमलों की कड़ी निंदा की है। शुक्रवार के खुत्बे के दौरान नमाजियों को संबोधित करते हुए, शेख अल-दोसारी ने घोषणा की कि ये पापपूर्ण हमले एक गंभीर अपराध हैं और भगवान द्वारा सम्मानित पवित्रता पर एक सीधा हमला हैं। इस तीखी निंदा ने उन लाखों लोगों की चिंताओं को बढ़ा दिया है जो इन पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर हमेशा फिक्रमंद रहते हैं, खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बीच जो वहां अपनी रोजी-रोटी कमाने जाते हैं।
क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा की स्थिति
यह निंदा क्षेत्र में सुरक्षा तनाव के एक बड़े दौर के बाद सामने आई है। घटना से एक दिन पहले यानी 24 सितंबर 2026 को सऊदी अरब ने हाउती आतंकवादियों द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया था, जिसके बाद मक्का समेत कई क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया था। हाउती ताकतों ने रियाद में संवेदनशील बुनियादी ढांचे और यानबू में अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाकर कई मिसाइल और ड्रोन हमलों की घोषणा की थी। इस तरह की घटनाओं से सऊदी अरब में काम करने वाले सभी प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि वहां भारत के भी लाखों नागरिक विभिन्न सेक्टरों में काम करते हैं।
सऊदी नेतृत्व और धार्मिक अधिकारियों के कड़े कदम
इस पूरे मामले पर सऊदी नेतृत्व ने बहुत कड़े कूटनीतिक और धार्मिक कदम उठाए हैं। किंग सलमान ने हाल ही में हाउती आंदोलन को एक 'आतंकवादी मिलिशिया' करार दिया है और इस बात पर जोर दिया है कि दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा देश के लिए एक 'रेड लाइन' है। वहीं दूसरी ओर, सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फजवान अल-फजवान ने 25 सितंबर 2026 को एक दुर्लभ अपील जारी करते हुए देश के सैनिकों से राष्ट्र की रक्षा करने का आह्वान किया है। इन बयानों से साफ पता चलता है कि सरकार देश की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है, जिसका सीधा असर वहां रहने वाले आम नागरिकों और कामगारों की दैनिक जीवनशैली पर भी पड़ता है।
मक्का गठबंधन और कूटनीतिक गतिविधियां
स्थानीय धार्मिक और सैन्य अपीलों के अलावा, पिछले महीने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बने रक्षा समझौते 'मक्का गठबंधन' ने भी बढ़ती शत्रुता के खिलाफ एक संयुक्त प्रतिक्रिया पर चर्चा शुरू कर दी है। इस रक्षा समझौते के नियमों के अनुसार, गठबंधन के किसी एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। ये सभी घटनाक्रम क्षेत्र में जारी अस्थिरता के बीच हो रहे हैं, हालांकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने हाउती अभियानों से अपनी सरकार को सीधे तौर पर अलग रखा है। खाड़ी क्षेत्र में हो रहे इन बड़े राजनीतिक और सैन्य बदलावों पर वहां रहने वाले भारतीय प्रवासियों की भी पैनी नजर रहती है, क्योंकि किसी भी बड़े विवाद का असर वहां की अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार पर पड़ सकता है।