सऊदी अरब के एयरपोर्ट्स पर हूती विद्रोहियों का मिसाइल हमला, भारी तबाही

सऊदी अरब एक बार फिर युद्ध की विभीषिका से जूझ रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने एक सोचे-समझे हमले के तहत सऊदी अरब के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इस भीषण हमले में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अब्हा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, जिससे वहां भारी अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में तीन लोगों की जान चली गई है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या साबरी ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका निशाना सटीक था, जिससे एयरपोर्ट का कामकाज पूरी तरह बाधित हो गया है।
हूती समूह ने यहीं नहीं रोका, बल्कि दुनिया भर की एयरलाइंस को एक अंतिम चेतावनी जारी करते हुए सऊदी हवाई क्षेत्र को अपने सैन्य अभियानों का केंद्र घोषित कर दिया है। इस हमले ने एक बार फिर क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
सऊदी गठबंधन का पलटवार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
हूती हमलों के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के सहयोग से गठबंधन ने यमन के सादा, होदेइदा, अल-जौफ और मारिब प्रांतों में हूती विद्रोहियों के 82 सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नागरिक सुविधाओं पर किए गए हमलों को माफ नहीं किया जाएगा और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। हालांकि, रियाद के उत्तर में एक मिसाइल को नाकाम किया गया, लेकिन एयरपोर्ट पर हुए सफल हमले ने रक्षा प्रणाली की कुछ कमियों को उजागर किया है।
इस संकट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। GCC महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदईवी ने इन हमलों को व्यवस्थित अपराध करार दिया है, वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने एयरपोर्ट्स पर हुए इन हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। अमेरिका ने भी सऊदी अरब में मौजूद अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है और उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी है।
दूसरी ओर, सऊदी राजनीतिक विश्लेषक खालिद बतार्फी ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि हालांकि हूती पहले भी ऐसी धमकियां दे चुके हैं, लेकिन अब सऊदी अरब अपनी रक्षा प्रणाली को पहले से कहीं अधिक मजबूत कर चुका है। उनके अनुसार, बेहतर एयर डिफेंस और आपसी समन्वय के कारण अब देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने में अधिक सक्षम है। इसी बीच ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि सीरिया इस संघर्ष में सऊदी गठबंधन की सैन्य मदद करने पर विचार कर रहा है।