सऊदी अरब हूती हमले: मंदी और सुरक्षा का दोहरा संकट

रियाद: सऊदी अरब इस समय एक साथ दो मोर्चों पर जूझ रहा है। एक तरफ़ यमन के हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमले लगातार जारी हैं, तो दूसरी तरफ़ देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव है। सऊदी अरब हूती हमले अब सिर्फ़ सीमा पार की झड़प नहीं रहे, बल्कि इन्होंने राजधानी से लेकर देश की आर्थिक योजनाओं तक को हिला दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक़ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सुरक्षित महलों के बीच आवाजाही कर रहे हैं। सऊदी अधिकारियों ने माना है कि हमलों की बढ़ती संख्या के बीच इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो गई है। हूती विद्रोही रियाद के मुख्य हवाई अड्डे को कम से कम चार बार निशाना बना चुके हैं।
सबसे गंभीर घटना शनिवार को हुई, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। ईरान से जारी संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका या उसके खाड़ी सहयोगियों पर यह अब तक का सबसे घातक हमला बताया जा रहा है।
अर्थव्यवस्था पर चोट और रुके प्रोजेक्ट
सुरक्षा संकट का असर देश की आर्थिक सेहत पर भी साफ़ दिख रहा है। वित्त मंत्रालय ने इस साल अर्थव्यवस्था में 3.6 प्रतिशत संकुचन का अनुमान जताया है। विज़न 2030 के तहत चल रही कई बड़ी परियोजनाएं, जिनमें नियोम जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी शामिल है, या तो रुक गई हैं या औपचारिक समीक्षा के दौर से गुज़र रही हैं।
विडंबना यह है कि क्राउन प्रिंस ने अमेरिका में लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का वादा किया था, जिसकी वजह से व्हाइट हाउस में उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ। लेकिन इस भारी निवेश के बदले उन्हें वह सैन्य समर्थन नहीं मिला, जिसकी वे अब मांग कर रहे हैं। वॉशिंगटन ने हूती ठिकानों पर सीधे सैन्य हस्तक्षेप की रियाद की मांग ठुकरा दी है और उसके बजाय सैन्य सलाहकार भेजने का रास्ता चुना है।
ऐसे में सऊदी अरब अब अपने हवाई रक्षा तंत्र को मज़बूत करने के लिए दूसरे स्रोतों की तलाश में है। इस सिलसिले में पाकिस्तान के साथ बातचीत की ख़बरें भी सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि क