Saudi Arabia में Houthis का हमला तेज़, तुर्किए और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों के साथ आपात बैठक बुलाई गई

Sushma Kumari25 September 20263 min read3 viewsSaudi
Saudi Arabia में Houthis का हमला तेज़, तुर्किए और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों के साथ आपात बैठक बुलाई गई

सऊदी अरब ने यमन की तरफ से लगातार बढ़ रहे हुती (Houthis) हमलों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने 25 सितंबर 2026 को आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की कि देश ने तुर्किए (Turkiye) और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों के साथ एक जरूरी बैठक बुलाई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आपसी रक्षा समझौते को लागू करने पर चर्चा करना है ताकि देश की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके और आम नागरिकों की रक्षा की जा सके। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला हाल ही में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद लिया गया है।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता और अधिकारियों की भागीदारी

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान, और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान 24 सितंबर 2026 को इस मुद्दे पर आपस में अहम चर्चा की थी। इसके बाद रियाद में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल सेलुक बायरक्तरोग्लू और पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हिस्सा ले रहे हैं। इन सभी की बातचीत का मुख्य केंद्र मक्का ज्वॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट (MJDA) है, जिस पर 7 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद और राष्ट्रपति तय्यब एर्दोगन ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के नियमों के अनुसार यदि किसी एक देश पर भी सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते की रूपरेखा को आगे बढ़ाने के लिए इससे पहले 31 अगस्त 2026 को इस्तांबुल में एक रणनीतिक और रक्षा समिति की बैठक भी हो चुकी है।

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हमलों की तीव्रता और सऊदी अरब की प्रतिक्रिया

यमन की तरफ से लगातार हो रहे हमलों के कारण स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। हुती विद्रोहियों ने 24 सितंबर 2026 को दावा किया था कि उन्होंने सऊदी अरब के ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। सऊदी सुरक्षा अधिकारियों ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने ताइफ (Taif) और यानबु (Yanbu) की ओर आ रही छह बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इस हमले के बाद मक्का, जेद्दा और यानबु जैसे प्रमुख शहरों में तुरंत आपातकालीन अलर्ट जारी किए गए ताकि लोगों को सुरक्षित रखा जा सके। बढ़ते तनाव को देखते हुए सऊदी ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फवजान अल फवजान ने सार्वजनिक रूप से सैनिकों से हुती ताकतों के खिलाफ डटकर मुकाबला करने की अपील की है।

यमन के अंदरूनी हालात और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया

यमन के भीतर जारी भीषण लड़ाई के कारण पिछले 24 घंटों में कम से कम 150 लोग हताहत हो चुके हैं। इस संघर्ष की वजह से 130,000 से अधिक लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं और विस्थापित हो चुके हैं। ताइज़ के पास और लाल सागर के तटवर्ती इलाकों में हुती बलों के आगे बढ़ने के कारण वहां के अस्पताल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और घायलों से भर चुके हैं। फ्रांस ने यानबु की सुरक्षा के लिए आगे आते हुए रडार और सैनिकों के जरिए रक्षात्मक सहायता देने का वादा किया है, लेकिन मक्का समझौते में शामिल अन्य देश अभी भी बहुत सावधानी से कदम उठा रहे हैं। तुर्किए की संसद ने अभी तक इस रक्षा समझौते का अनुमोदन नहीं किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, न तो तुर्किए और न ही पाकिस्तान ने अभी तक इस मामले में सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप करने की कोई प्रतिबद्धता जताई है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इस समझौते में हुती विद्रोहियों को स्पष्ट रूप से दुश्मन के रूप में नामित नहीं किया गया है। सऊदी अरब में रह रहे प्रवासियों और भारतीय कामगारों के लिए भी स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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