मक्का के पास सऊदी अरब ने गिराया हूती ड्रोन, गठबंधन सेना ने हमले को बताया शर्मनाक कृत्य

सऊदी अरब की राजधानी और पवित्र स्थलों के पास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ Royal Saudi Air Defence Forces ने मंगलवार की रात को एक खतरनाक हूती ड्रोन को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। यह ड्रोन मक्का के दक्षिण में स्थित प्रतिबंधित एयरस्पेस की तरफ बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा था जिसे समय रहते सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। गठबंधन सेना के प्रवक्ता Maj. Gen. Turki al-Malki ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिकों और तीर्थयात्रियों में डर पैदा करने वाला एक बेहद शर्मनाक कृत्य बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि दोनों पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उनके लिए एक लक्ष्मण रेखा है जिस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। दूसरी तरफ हूती विद्रोहियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक झूठ और मनगढ़ंत कहानी बताया है। हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree का कहना है कि उनके निशाने पर केवल सऊदी अरब के तेल संयंत्र और सैन्य ठिकाने ही होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मारिब के ऊपर एक सऊदी F-15 फाइटर जेट को भी गिराने का दावा किया है जिसकी पुष्टि अभी तक रियाद सरकार की तरफ से नहीं की गई है।
क्षेत्रीय तनाव और बंदरगाहों पर कब्जा
यमन के पास चल रहे संघर्ष के कारण पूरे इलाके में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। हाल ही में हूती बलों ने बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास स्थित मोचा बंदरगाह, पेरिम द्वीप और हानीश द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। पिछले शुक्रवार को इराक की जमीन से एक ड्रोन हमला किया गया था जिसके बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को एहतियात के तौर पर बंद करना पड़ा था। इस बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और ग्लोबल ऑयल की कीमतें लगभग $108 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि यह संकट लंबे समय तक चला तो इससे दुनिया भर की कुल तेल सप्लाई का 4 प्रतिशत हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से वहां काम करने वाले प्रवासियों और आम लोगों की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं क्योंकि लगातार बिगड़ते हालातों का असर रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई और हवाई हमले
हूती हमलों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सऊदी युद्धक विमानों ने इस हफ्ते यमन के अलग-अलग इलाकों में करीब 450 एयरस्ट्राइक्स को अंजाम दिया है। इन हमलों में ताइज, होदेहा, अल-जौफ, मारिब और लाहज जैसे इलाकों में हूती ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हूती द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ताइज में हुए इन हमलों में दो बच्चों समेत तीन आम नागरिकों की मौत हो गई है। सऊदी समर्थित यमन की सरकार ने गठबंधन सेना के इन सैन्य अभियानों की पुष्टि की है हालांकि रियाद ने हमलों की सटीक संख्या के बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हूती मीडिया ने कुछ वीडियो फुटेज भी जारी किए हैं जिनमें उनके लड़ाकों को अल-जौफ इलाके में 15 सितंबर 2026 को बख्तरबंद गाड़ियों पर कब्जा करते हुए दिखाया गया है। लगातार हो रही इन सैन्य कार्रवाइयों से आम जनता की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं और लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश करने पर मजबूर हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ठप पड़े कूटनीतिक प्रयास
बढ़ते खतरे को देखते हुए दुनिया भर के देशों और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। अमेरिका ने अपने यात्रा परामर्श को और अधिक सख्त बनाते हुए सरकारी कर्मचारियों को यमन की सीमा से 30 किलोमीटर के दायरे में जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान ने भी इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC ने मक्का या मदीना पर हमले के प्रयास को एक अस्वीकार्य और असहनीय उल्लंघन करार दिया है। कूटनीतिक स्तर पर शांति स्थापित करने के सारे प्रयास फिलहाल रुके हुए हैं। ओमान की राजधानी में ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली नियोजित बातचीत को होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर बनी असहमतियों के कारण टाल दिया गया है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi चल रहे संघर्ष के बीच चीनी समर्थन हासिल करने के लिए बीजिंग की यात्रा पर गए हैं ताकि इस गंभीर स्थिति में कूटनीतिक मोर्चे पर कुछ राहत मिल सके।