Saudi Arabia Oil Export: सऊदी अरब पर बड़ा संकट, तेल सप्लाई जारी रखने के लिए उठाए गए आपातकालीन कदम.

Aanya19 September 20263 min read23 viewsSaudi
Saudi Arabia Oil Export: सऊदी अरब पर बड़ा संकट, तेल सप्लाई जारी रखने के लिए उठाए गए आपातकालीन कदम.

क्षेत्रीय सुरक्षा संकट और बढ़ते तनाव के बीच दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश Saudi Arabia वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए लगातार आपातकालीन कदम उठा रहा है। फारसी खाड़ी यानी Strait of Hormuz और लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा खतरे बढ़ने के बाद से सऊदी अधिकारियों ने कच्चे तेल के निर्यात के रास्ते बदल दिए हैं। इस स्थिति का असर भारत समेत कई बड़े देशों की रिफाइनरियों पर भी पड़ रहा है, जिससे आम आदमी के लिए आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

तेल की ढुलाई और रूट में बदलाव

19 सितंबर 2026 तक की स्थिति के अनुसार, Saudi Aramco ने अपने रास तनौरा पोर्ट यानी Ras Tanura port से सितंबर और अक्टूबर के लिए निर्धारित लगभग 60 मिलियन बैरल कच्चे तेल को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट कर दिया है। चल रहे संघर्षों और सुरक्षा जोखिमों से बचने के लिए इन शिपमेंट को ओमान के सोहर पोर्ट यानी Sohar port पर शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए मैनेज किया जा रहा है। इस तेल का मुख्य हिस्सा चीन और दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियों के अलावा भारत और जापान को भेजा जा रहा है ताकि एशियाई बाजारों में तेल की कमी न हो।

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यूरोपीय ग्राहकों को बड़ा झटका

एक तरफ जहां एशियाई देशों के लिए रास्ते बदले गए हैं, वहीं बुनियादी ढांचे यानी इंफ्रास्ट्रक्चर को पहुंचे नुकसान के कारण सऊदी अरब ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को अक्टूबर के लिए कच्चे तेल का आवंटन रद्द कर दिया है। बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे यूरोपीय देशों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से पहले सऊदी अरब का घरेलू तेल उत्पादन 10.1 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) था, जो अगस्त 2026 तक गिरकर मात्र 6.24 मिलियन बैरल प्रति दिन पर आ गया है। उत्पादन में इस भारी गिरावट की मुख्य वजह ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन यानी East-West Pipeline का बंद होना है। इस पाइपलाइन की क्षमता 7 मिलियन बैरल प्रति दिन है और इराक से जुड़े ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा पिछले सप्ताह किए गए एक हमले के बाद इसे बंद करना पड़ा था।

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, Saudi Aramco का लक्ष्य अगले कुछ दिनों के भीतर इस पाइपलाइन को आंशिक रूप से फिर से शुरू करना है, जबकि पूरी क्षमता के साथ संचालन बहाल होने में लगभग छह सप्ताह का समय लगने का अनुमान है। यह पाइपलाइन Strait of Hormuz से बचकर निकलने के लिए बेहद जरूरी है, जहां 19 सितंबर 2026 को ईरान ने एक अवैध क्रॉसिंग के आरोप में एक टैंकर पर हमला करने की बात कही थी, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने एक अन्य पोत के अज्ञात प्रोजेक्टाइल से टकराने की पुष्टि की थी।

सुरक्षा अलर्ट और क्षेत्रीय तनाव

क्षेत्रीय तनाव उस समय और बढ़ गया जब 19 सितंबर 2026 को रियाद हवाई अड्डे के पास हुए धमाकों और हौथी गतिविधियों के बाद सऊदी अधिकारियों ने रियाद, जेद्दा और यान्बू के लिए एयर-रेड अलर्ट जारी कर दिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UN Security Council ने नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों की औपचारिक रूप से निंदा की है। इस बीच, संकट को देखते हुए सऊदी अरब ने ईरान पर हौथी विद्रोहियों के हमलों को रोकने के लिए दबाव बनाने के वास्ते चीन से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। यमन के हौथी विद्रोहियों द्वारा रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने और बाब अल-मैंडब जलडमरूमध्य यानी Bab al-Mandab Strait के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण बनाए रखने के कारण सुरक्षा की स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।

OPEC+ की बैठक और भविष्य की योजना

इन तमाम घटनाओं से पहले 6 सितंबर 2026 को एक वर्चुअल OPEC+ बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान के प्रतिनिधियों ने अक्टूबर 2026 के उत्पादन स्तर को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई थी। यह समूह अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन और वैश्विक बाजार की स्थिरता पर बुनियादी ढांचे के हमलों के प्रभावों की लगातार निगरानी कर रहा है ताकि दुनिया भर में ऊर्जा संकट को टाला जा सके।

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