सऊदी अरब पर बड़ा हमला, यमन के हूती विद्रोहियों ने दागे मिसाइल और ड्रोन, तेल की कीमतों में भारी उछाल.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 25 सितंबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक लगभग 3% की जोरदार तेजी देखने को मिली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव का माहौल काफी बढ़ गया है और आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों की चिंता भी बढ़ गई है।
सऊदी अरामको और सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटीय शहर यानबू में स्थित सरकारी ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा किया। इसके अलावा राजधानी रियाद में भी एक संवेदनशील ठिकाने को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेई ने इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोनों के इस्तेमाल की पुष्टि की। हालांकि सऊदी अधिकारियों की तरफ से अभी तक यानबू स्थित अरामको की सुविधाओं या रियाद में किसी भी तरह के नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
सऊदी अरब के कई शहरों में इमरजेंसी अलर्ट
इन लगातार हमलों के बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का, यानबू, ताइफ, जेद्दा और तबूक सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया। सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ताइफ और यानबू क्षेत्र की तरफ आ रही 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने हूती मिलिशिया की इन हरकतों को गंभीर उल्लंघन बताते हुए कड़ा जवाब देने की बात कही है। दूसरी तरफ, फ्रांस सरकार ने इस संकट के समय यानबू ऑयल टर्मिनल की सुरक्षा के लिए सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने का वादा किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और ईरान की प्रतिक्रिया
दुनियाभर के करीब 80 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान और उसके सहयोगी हूती विद्रोहियों के इन हमलों की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलने की मांग की। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इन हमलों में तेहरान की किसी भी तरह की सीधी संलिप्तता से साफ इनकार किया और कहा कि हूती विद्रोही अपने दम पर फैसले लेते हैं। इन हमलों की वजह से सऊदी अरब के तेल निर्यात पर असर पड़ने का डर एक बार फिर गहरा गया है, खासकर तब जब देश पहले से ही जुलाई से लागू नौका नाकाबंदी और शिपिंग रूट की बाधाओं का सामना कर रहा है।