सऊदी अरब में ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन फिर से हुई चालू, ड्रोन हमले के बाद तेल सप्लाई शुरू।

सऊदी अरब ने अपनी बेहद अहम East-West Pipeline, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, पर कामकाज दोबारा शुरू कर दिया है। यह बड़ी पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्सों से कच्चे तेल को निकालकर लाल सागर के पास मौजूद यानबु पोर्ट तक भेजने का काम करती है ताकि वहां से तेल का निर्यात किया जा सके। सितंबर की शुरुआत में हुए ड्रोन हमलों की वजह से इस पाइपलाइन को बंद करना पड़ा था, लेकिन अब 22 सितंबर 2026 से इसे फिर से चालू कर दिया गया है।
ड्रोन हमलों के बाद तेल सप्लाई पर असर
रॉयटर और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन खास सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि तेल पंप करने का काम दोबारा शुरू हो चुका है, हालांकि शुरुआत में यह बहुत कम मात्रा में चल रहा है। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस 4-मिलियन-बैरल-प्रति-दिन क्षमता वाली पाइपलाइन को पूरी तरह से ठीक होने और अपनी पूरी रफ्तार से काम करने में छह से आठ हफ्ते का समय लग सकता है। हालांकि, कुछ ही दिनों में इसकी क्षमता को 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की पूरी उम्मीद जताई गई है।
क्षतिग्रस्त हिस्सों को दरकिनार कर शुरू हुआ काम
इस हमले में पाइपलाइन के रास्ते में आने वाले तीन पंपिंग स्टेशन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके बाद सरकारी ऊर्जा कंपनी Saudi Aramco ने खराब हो चुके हिस्सों को छोड़कर तेल के बहाव को दोबारा शुरू करने का रास्ता निकाला। हालांकि सऊदी अरामको की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों का मानना है कि इस बहाव के शुरू होने से यानबु से तेल का निर्यात आज ही शुरू हो जाएगा और कम से कम एक कार्गो चीन के लिए रवाना किया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डिमोक्रैसिस की जांच में सामने आया है कि ये ड्रोन हमले इराक के मैसान प्रांत से किए गए थे और इसके पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया का हाथ था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी यानी IEA ने पहले ही इस बात पर जोर दिया था कि ईस्ट-वेस्ट सिस्टम सऊदी अरब के लिए हॉर्मूज जलडमरूमध्य को छोड़कर तेल भेजने का एक बहुत सुरक्षित और जरूरी रास्ता है। जब यह पाइपलाइन बंद थी, तब सऊदी अरब ने दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल किया था और गल्फ के रास्तों जैसे रस तन्नूरा से तेल की लोडिंग बढ़ाई थी, जहां 20 सितंबर तक सात बड़े जहाजों पर लगभग 14 मिलियन बैरल तेल लादा गया था। इस खबर के आने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखने को मिली है और व्यापारी अपने जहाजों को मिस्र के पोर्ट सईद और सिदी केरीर के पास ले जा रहे हैं।