Saudi Arabia पर मंडराया सुरक्षा संकट, अमेरिकी अधिकारी बोले- क्राउन प्रिंस के मन में अमेरिका को लेकर है डर.

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Lt Gen (Retd) HR McMaster ने सऊदी अरब और खाड़ी देशों के सामने आ रही बड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman इस समय काफी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं, क्योंकि क्षेत्रीय अशांति की वजह से देश के महत्वाकांक्षी आर्थिक विकास प्लान यानी Vision 2030 पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि बिना सुरक्षा और शांति के किसी भी देश में आर्थिक तरक्की होना मुमकिन नहीं है।
सऊदी की सुरक्षा और विजन 2030 पर खतरा
HR McMaster ने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि न सिर्फ सऊदी अरब का बुनियादी ढांचा बल्कि पवित्र शहर मक्का भी हमलों की चपेट में आ चुका है। क्राउन प्रिंस और यूएई के नेता अपने देशों को एक सुरक्षित माहौल देना चाहते हैं ताकि वे दुनिया के बड़े वित्तीय केंद्र बन सकें। इसके साथ ही वे डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI क्रांति और अन्य आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना चाहते हैं। लेकिन ऐसे हमलों की वजह से क्राउन प्रिंस को हमेशा यह सोचना पड़ता है कि आखिर उनका साथ कौन देगा।
अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर उठ रहे सवाल
अमेरिका के सहयोग को लेकर सऊदी अरब के मन में कई तरह की शंकाएं बनी हुई हैं। पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि रियाद को यह पक्का भरोसा नहीं है कि अमेरिका लंबे समय तक उनका साथ देगा या नहीं। राष्ट्रपति Donald Trump के कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन कड़े फैसले ले सकता है, लेकिन वहां यह सोच भी रहती है कि देशों को अपनी रक्षा खुद भी करनी चाहिए। इसी वजह से सऊदी नेतृत्व के मन में अमेरिकी वादों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है।
ईरान की चाल और खाड़ी देशों में फूट डालने की कोशिश
ईरान खाड़ी देशों के बीच आपसी दूरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। ईरान कभी किसी देश को निशाना बनाता है तो कभी दूसरे देश को छोड़ देता है ताकि खाड़ी के देश एक होकर उसका मुकाबला न कर सकें। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय हमलों में यूएई को इजरायल से भी ज्यादा बार निशाना बनाया गया है। एक आंकड़े के मुताबिक इजरायल पर करीब 600 और यूएई पर लगभग 3,000 बार हमले हुए हैं, जो क्षेत्रीय तनाव की गंभीरता को साफ दिखाते हैं।
ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर मंडराता अस्तित्व का संकट
खाड़ी देशों के नेताओं का मानना है कि इस तरह के हालात को जल्द खत्म होना चाहिए ताकि देश नुकसान से बच सकें। छोटी-मोटी पाइपलाइन की टूट-फूट को तो ठीक किया जा सकता है, लेकिन प्राकृतिक गैस संयंत्रों और रिफाइनिंग इकाइयों पर होने वाले हमलों को ठीक करने में बहुत लंबा समय लगता है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े ये अहम ठिकाने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन पर खतरा होने से पूरे क्षेत्र का भविष्य दांव पर लग जाता है। इस पूरे हालात की विस्तृत जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं।