सऊदी अरब पर बड़ा हमला, ताइफ और मक्का की तरफ दागी गई मिसाइलें, अब तुर्किए और पाकिस्तान के साथ होगी आपात बैठक.

Praggya Singh sabal25 September 20263 min read22 viewsSaudi
सऊदी अरब पर बड़ा हमला, ताइफ और मक्का की तरफ दागी गई मिसाइलें, अब तुर्किए और पाकिस्तान के साथ होगी आपात बैठक.

सऊदी अरब पर हुए हालिया हमलों के बाद अब देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को सऊदी विदेश मंत्रालय ने यह ऐलान किया है कि देश पर हुए हमलों के बाद अब सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों के बीच एक आपातकालीन बैठक होने जा रही है। यह फैसला ठीक एक दिन पहले यानी गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को हुए एक बड़े और समन्वित हमले के बाद लिया गया है, जिसमें यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की तरफ कई मिसाइलें दाग दी थीं। इन हमलों के बाद से पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

मिसाइल हमलों का शिकार बने प्रमुख शहर

हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई इन खतरनाक मिसाइलों को सऊदी रक्षा प्रणाली ने हवा में ही नाकाम कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया गया। ये मिसाइलें देश के बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाकों को निशाना बनाकर दागी गई थीं। जिन जगहों को टारगेट किया गया था उनमें ताइफ, लाल सागर के पास स्थित यानबू इलाका, पवित्र शहर मक्का और जेद्दा शामिल हैं। इन इलाकों पर इस तरह के हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क कर दिया है, क्योंकि इनमें धार्मिक स्थल और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण तेल केंद्र भी शामिल हैं।

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मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत होगी बैठक

यह आगामी सैन्य बैठक मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के नियमों के तहत आयोजित की जाएगी। इस समझौते पर इसी साल 7 अगस्त 2026 को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति तायिप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के मुताबिक, अगर तीनों देशों में से किसी एक पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। हालांकि इस समझौते का पूरा पाठ अभी गोपनीय रखा गया है, लेकिन तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में मुलाकात करके इस आगामी रक्षा बैठक की रूपरेखा तैयार कर ली है ताकि सऊदी सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

हूती प्रवक्ता ने ली हमले की जिम्मेदारी

यमन के हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने इन हमलों की जिम्मेदारी खुले तौर पर ली है। उनका कहना था कि इन हमलों का मुख्य निशाना यानबू में स्थित सऊदी अरामको की सुविधाएं, रियाद के संवेदनशील ठिकाने और दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र का जाazan इलाका था। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। संयुक्त राष्ट्र में 80 देशों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलने की मांग की है। इसके अलावा, फ्रांस ने भी संकट के समय यानबू ऑयल टर्मिनल की सुरक्षा में मदद के लिए अपने सैन्य संसाधन तैनात करने का वादा किया है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ईरान का रुख

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इन हमलों में किसी भी तरह की सीधी संलिप्तता से साफ इनकार कर दिया है। उनका दावा है कि हूती विद्रोही तेहरान के नियंत्रण से बाहर होकर पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। वहीं दूसरी ओर, हूती नेतृत्व ने तुर्किए और पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दोनों देश इस संघर्ष के बीच में आने से दूर रहें। इस बीच, सभी संबंधित देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत सऊदी अरब के अपने देश और territorio की रक्षा करने के अधिकार का पूरा समर्थन किया है।

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