Saudi Arabia: सऊदी ने यूएन में उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा, हुती हमलों के खिलाफ मांगी मदद.

सऊदी अरब ने दुनिया भर के देशों से समंदर में होने वाले ब्लैकमेल और हमलों के खिलाफ मिलकर सख्त कदम उठाने की अपील की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों और समुद्र का इस्तेमाल राजनीतिक या आर्थिक फायदे के लिए दबाव बनाने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा पर जोर
26 सितंबर 2026 को यूएन जनरल असेंबली में बोलते हुए प्रिंस फैसल ने कहा कि पूरी दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार और नेविगेशन की सुरक्षा सबकी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने लाल सागर और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में शिपिंग लेन को लगातार निशाना बना रहे हुती मिलिशिया के हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इन रास्तों पर खतरा पैदा करने से दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा और सामान सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होती है। सऊदी सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के रास्तों को सुरक्षित रखना वैश्विक शांति के लिए बहुत जरूरी है और इस मामले में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए.
टैक्स और फीस लगाने पर कड़ी आपत्ति
सऊदी मंत्री ने समुद्री पारगमन यानी मैरीटाइम ट्रांजिट पर किसी भी तरह के नए शुल्क या फीस थोपने के खिलाफ अपनी सरकार का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के प्रति सऊदी अरब की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि अरब खाड़ी की स्थिरता इन सभी कोशिशों के केंद्र में है। इस बयान से कुछ दिन पहले ही कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई बड़ी बैठकें हुई थीं। 24 सितंबर को प्रिंस फैसल ने समुद्री क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक मंत्री स्तर की बैठक में हिस्सा लिया था। उससे पहले 22 सितंबर को राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सउद की अध्यक्षता में सऊदी कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा हमेशा कानून के दायरे में और देशों की संप्रभुता का सम्मान करते हुए होनी चाहिए.
हालिया हमलों के बाद बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व के इन अहम जलमार्गों को लेकर दुनिया भर के देशों की चिंता लगातार बनी हुई है। हाल ही में सुरक्षा से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 24 सितंबर को ताइफ और यानबू शहर को निशाना बनाकर दागे गए छह हुती मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया गया था। इन लगातार हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है और सुरक्षा के मद्देनजर फ्रांस ने भी इस इलाके में अपनी रक्षात्मक संपत्तियों और युद्धपोतों को तैनात कर दिया है। इन तमाम मामलों की पूरी जानकारी आप Saudi Press Agency (SPA) की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के लिए भी व्यापारिक और सप्लाई चेन की यह सुरक्षा बहुत मायने रखती है क्योंकि किसी भी तरह की अशांति का सीधा असर रोजमर्रा की चीजों और यात्रा पर पड़ता है।