सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई आवाज, जलमार्गों की सुरक्षा और नेविगेशन प्रतिबंधों का किया विरोध.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया भर के समुद्रीय रास्तों पर नेविगेशन की पूरी आजादी होनी चाहिए और किसी भी तरह के प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सऊदी सरकार चाहती है कि 28 फरवरी से पहले जैसी स्थिति थी, उसे तुरंत बहाल किया जाए ताकि जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए और किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क न वसूला जाए।
महत्वपूर्ण जलमार्गों की सुरक्षा पर जोर
सऊदी विदेश मंत्री ने न्यूयॉर्क में आयोजित इस वैश्विक मंच पर जोर देकर कहा कि हर्म जलडमरूमध्य, बाब अल-मंडब, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे बेहद अहम जलमार्गों की सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब किसी भी देश या पक्ष द्वारा इन महत्वपूर्ण रास्तों को दबाव बनाने, धमकी देने या अंतरराष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिशों को पूरी तरह खारिज करता है। मौजूदा समय में दुनिया भर में चल रहे विवादों और संकटों का कारण संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन न करना है।
क्षेत्रीय तनाव और ईरान के हमलों की निंदा
इस सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रिंस फैसल ने ईरान द्वारा सऊदी अरब और अन्य देशों पर किए गए सीधे हमलों की कड़ी निंदा की। इन हमलों में सुरक्षा, देश की क्षमताओं के साथ-साथ नागरिकों और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। सऊदी अरब ने एक बार फिर दोहराया कि देश अपनी संप्रभुता, नागरिकों, निवासियों और राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा करने का पूरा अधिकार रखता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की गई कि वे वैश्विक शांति के सामने आ रहे इन खतरों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
सऊदी अरब का मानना है कि अरब खाड़ी की सुरक्षा सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, सप्लाई चेन और नौवहन से जुड़ी हुई है। इन हितों की रक्षा करना किसी एक देश की नहीं बल्कि सबकी साझी जिम्मेदारी है। खाड़ी देशों में रहने वाले और वहां यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह स्थिरता बहुत मायने रखती है, क्योंकि इससे नौकरी, व्यापार और महंगाई जैसी चीजें सीधे प्रभावित होती हैं। संकट के समय में दबदबा बनाने की नीतियों को छोड़कर आपसी सम्मान और अच्छे पड़ोसी वाले रिश्तों को बढ़ावा देना ही समझदारी है।
परमाणु हथियार और फिलिस्तीन का मुद्दा
अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने मध्य पूर्व को सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त रखने की अपनी पुरानी मांग को फिर से उठाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रमों की कड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी होनी चाहिए। इसके अलावा, फिलिस्तीन के लोगों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए उन्होंने गाजा और वेस्ट बैंक के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना, मानवीय सहायता रोकना और अवैध बस्तियां बसाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। सऊदी अरब ने 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश बनाने और पूर्वी यरुशलम को उसकी राजधानी घोषित करने के अपने समर्थन को दोहराया।