Saudi Arabia Rules: सऊदी अरब का सख्त नियम, विदेशियों के आने के 90 दिन के अंदर बनवाना होगा वर्क परमिट.

सऊदी अरब में नौकरी की तलाश में जाने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक बहुत जरूरी खबर सामने आई है। सऊदी सरकार ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि किसी भी नए विदेशी कर्मचारी के देश में आने के ठीक 90 दिनों के भीतर उसका वर्क परमिट यानी कार्य अनुमति पत्र बन जाना चाहिए। इस नियम की पूरी जिम्मेदारी कंपनी या नियुक्त करने वाले संस्थान की होती है, न कि अकेले काम करने वाले कर्मचारी की। अधिकारियों के मुताबिक यह नियम उन सभी लाखों भारतीय कामगारों के लिए बहुत मायने रखता है जो वहां रहकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
नियम और जिम्मेदारियां
सऊदी श्रम कानून के अनुच्छेद 40 के तहत यह साफ तौर पर लिखा है कि कामगारों को लाने का पूरा खर्च, रेजिडेंस परमिट यानी इकामा बनवाने और उसे नवीनीकरण कराने का खर्च, वर्क परमिट का खर्च और किसी भी तरह की देरी से लगने वाला जुर्माना सब कुछ कंपनी को ही देना होगा। इस समय सऊदी अरब में लगभग 2.74 लाख भारतीय लोग रह रहे हैं जो कंस्ट्रक्शन, स्वास्थ्य सेवा, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स और आईटी जैसे अलग-अलग सेक्टरों में काम कर रहे हैं। इन सभी लोगों के लिए यह 90 दिन की समय सीमा कानूनी रूप से सुरक्षित रहने के लिए बेहद जरूरी है।
90 दिन की गिनती कब से शुरू होगी
यह 90 दिन का समय उस दिन से शुरू होता है जिस दिन कोई भी कर्मचारी असल में सऊदी अरब की धरती पर कदम रखता है, न कि उस तारीख से जब भारत में उसका वीजा जारी हुआ था या उसने कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। सऊदी पहुंचने के बाद कंपनियों को तुरंत मेडिकल जांच और परमिट की कागजी कार्रवाई शुरू कर देनी चाहिए। कामगारों को यह सलाह दी जाती है कि वे केवल कंपनी के मौखिक वचनों पर भरोसा न करें बल्कि अपनी एचआर टीम से लिखित रूप में अपने स्टेटस की जानकारी लेते रहें ताकि बाद में किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
वर्क परमिट और इकामा में अंतर
आपको बता दें कि वर्क परमिट और इकामा दोनों अलग-अलग दस्तावेज हैं लेकिन आपस में जुड़े हुए हैं। वर्क परमिट का काम मानव संसाधन मंत्रालय यानी HRSD संभालता है जबकि रहने के अधिकार यानी रेजिडेंस स्टेटस का काम पासपोर्ट विभाग यानी Jawazat देखता है। कई बार परमिट का पैसा भरने के बाद भी पासपोर्ट सिस्टम में अपडेट होने में थोड़ा समय लग जाता है, इसलिए कर्मचारियों को आधिकारिक कागजात के जरिए ही अपने स्टेटस की सही जांच करनी चाहिए। कानून के मुताबिक कोई भी कंपनी कर्मचारी से रिक्रूटमेंट या परमिट का पैसा नहीं मांग सकती है। यदि कोई कंपनी ऐसा करती है तो कर्मचारियों को अपने कॉन्ट्रैक्ट की जांच नियमों के अनुसार करनी चाहिए।
गलत तरीकों से बचें और मदद कहां लें
यदि कोई कंपनी 90 दिन के अंदर परमिट नहीं बनवाती है, तो एचआरएसडी के पास सर्विस ट्रांसफर का एक विशेष नियम है जो कंपनी की निताकात कैटेगरी पर निर्भर करता है। बिना वैध परमिट के किसी दूसरी जगह काम करना सऊदी कानून के खिलाफ है। नौकरी बदलने या ट्रांसफर कराने के लिए केवल Qiwa या HRSD के आधिकारिक रास्तों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी दलाल को अपना ओटीपी या बैंक की जानकारी बिल्कुल न दें। अगर कोई कंपनी निताकात की 'रेड जोन' सूची में आती है, तो वह नया वर्क परमिट नहीं जारी कर सकती है। किसी भी तरह की समस्या या विवाद होने पर भारतीय कामगार रियाद स्थित भारतीय दूतावास से उनके 24 घंटे चलने वाले हेल्पलाइन नंबर 00-966-11-4884697 पर, व्हाट्सएप नंबर 00966-542126748 पर या सऊदी के टोल-फ्री नंबर 800 247 1234 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा MADAD पोर्टल या HRSD के统一 हेल्पलाइन नंबर 19911 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।