सऊदी गठबंधन का बड़ा एक्शन: हूती विद्रोहियों के खिलाफ 'ऑपरेशन फज्र अल-यमन' शुरू, 300 से ज्यादा ठिकाने तबाह

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। सोमवार को 'ऑपरेशन फज्र अल-यमन' (यमन की सुबह) के तहत गठबंधन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिसमें 100 लड़ाकू विमानों को तैनात किया गया। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मालकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि इस अभियान के शुरुआती चरण में ही 324 उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। इसके साथ ही बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए हवाई कवर भी प्रदान किया गया है।
यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के राष्ट्रपति परिषद के अध्यक्ष रशाद अल-अलिमी ने स्पष्ट किया कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य राज्य संस्थानों को बहाल करना, हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना और राजधानी सना को मुक्त कराना है। वहीं, यमनी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल माजिद अब्दुल्ला अल-नुज़ैली ने दावा किया कि सरकारी बलों ने बाब अल-मंडेब क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया है और मोचा से ज़ुबाब हवाई अड्डे को जोड़ने वाले रास्ते को काट दिया है, जिससे सैकड़ों हूती लड़ाके फंस गए हैं।
क्षेत्रीय तनाव और आर्थिक असर
दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सा़री ने दावा किया कि गठबंधन ने सना, अल-जौफ और तइज़ सहित उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में 106 हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने घोषणा की है कि जब तक अमेरिका 14-सूत्रीय समझौते की सात शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।
इस युद्ध का असर आम जनता की जेब पर भी पड़ रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जहाँ सुपर 98 की कीमत 4.40 दिरहम तक पहुँच गई है। फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से खुदरा दरों में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जबकि G7 देशों द्वारा आपातकालीन रिजर्व से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की कोशिशें की जा रही हैं।
सुरक्षा कारणों से Flydubai ने इज़राइल के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। इस पूरे संकट का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासी मजदूरों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें अपनी यात्रा और सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।