सऊदी गठबंधन ने होदेइदा में हूती मिलिशिया की हथियारों की तस्करी को रोका और यमन में की बड़ी सैन्य कार्रवाई

Nura Basta16 October 20262 min read0 viewsYemen
सऊदी गठबंधन ने होदेइदा में हूती मिलिशिया की हथियारों की तस्करी को रोका और यमन में की बड़ी सैन्य कार्रवाई

होदेइदा (यमन): सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने होदेइदा गवर्नरशिप में हूती मिलिशिया के पास पहुँच रहे हथियारों की समुद्री तस्करी को रोकने के लिए बड़ा ऑपरेशन चलाया है। गठबंधन ने 16 अक्टूबर 2026 को इस कार्रवाई के सबूत के तौर पर तस्वीरें जारी की हैं। यमन में बढ़ते तनाव के बीच यह हमला तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए किया गया है।

यमन की सेना ने भी उसी दिन हूती ठिकानों पर कई बड़े सैन्य हमले किए। सैन्य आकलन के अनुसार, 16 अक्टूबर से पहले के 24 घंटों में गठबंधन समर्थित यमनी सेना ने करीब 1,250 से 1,292 हमले किए। इन कार्रवाइयों में 430 से 700 हूती लड़ाकों के मारे जाने और 100 से 150 सैन्य वाहनों के नष्ट होने की खबर है।

तैज़ के दक्षिण में अल-मिसरख जिले में भीषण लड़ाई जारी है। यहाँ विमानों ने रास अन-नजद में टैंकों के काफिले और सोफिटेल हिल पर स्थित ठिकानों को निशाना बनाया। सरकारी सैनिकों ने अल-अकरुद और अश-शकाब एक्सिस पर हूतियों के हमलों को नाकाम कर दिया है।

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सऊदी गठबंधन ने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने यनबू की ओर आने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल, लाल सागर के ऊपर दो क्रूज मिसाइलों और रियाद व दक्षिणी क्षेत्र की ओर भेजे गए तीन ड्रोन को बीच में ही रोक दिया। यमनी सूचना मंत्री मोअम्मर अल-एरयानी ने बताया कि हूतियों ने अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो मिसाइलें दागीं, लेकिन यात्री और चालक दल सुरक्षित रहे।

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब पर हमलों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। ईरान ने इस मामले में शांतिपूर्ण समाधान निकालने में मदद करने की इच्छा जताई है।

इस युद्ध का मानवीय असर बहुत गंभीर हो गया है, खासकर तैज़ शहर में जो हूतियों के घेरे में है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी की प्रवक्ता जोई ब्रेनन के मुताबिक, हालिया लड़ाई में 2,33,077 लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से 1,21,530 अकेले तैज़ से हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रवक्ता तारिक जासारेविक ने चेतावनी दी है कि तैज़ के 12 अस्पतालों में ऑक्सीजन और दवाओं की भारी कमी हो गई है। सड़कों के बंद होने से मानवीय सहायता नहीं पहुँच पा रही है और अस्पतालों में ईंधन का स्टॉक अब केवल चार दिनों तक ही चल पाएगा।

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