सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने अनोजन शिवरासा की मौत की सजा रद्द की

सऊदी अरब: सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंकाई प्रवासी मजदूर अनोजन शिवरासा की मौत की सजा रद्द कर दी है। यह फैसला 13 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया, जिसकी पुष्टि श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने 14 अक्टूबर को की।
अनोजन शिवरासा 24 साल के हैं और कलमुनई के रहने वाले एक निर्माण मजदूर हैं। जून 2026 के आखिर में उन्होंने फेसबुक पर तमिल भाषा में एक टिप्पणी पोस्ट की थी, जिसे पैगंबर मोहम्मद के लिए अपमानजनक माना गया। टिप्पणी की शिकायत के बाद उन्होंने पोस्ट हटा दी और माफी वाला वीडियो जारी किया।
शिवरासा को 1 जुलाई 2026 को दम्माम में गिरफ्तार किया गया था। 15 जुलाई 2026 को अल-अहसा की आपराधिक अदालत ने उन्हें साइबर क्राइम कानून के तहत पांच साल की कैद और 30 लाख सऊदी रियाल के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को पूर्वी क्षेत्र की अपील अदालत ने सजा बढ़ाकर मौत कर दी और इस अपराध को शरिया के तहत "हद" सजा की श्रेणी में रखा।
रिपोर्टों के मुताबिक गिरफ्तारी से लेकर शुरुआती सजा तक शिवरासा को कानूनी सलाहकार नहीं मिल पाया था। इस मामले में श्रीलंका सरकार की ओर से कई स्तर पर कूटनीतिक और कानूनी प्रयास किए गए।
श्रीलंका के उप विदेश मंत्री अरुण हेमचंद्र और विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने सऊदी सरकार के सहयोग और कानूनी टीमों के योगदान के लिए आभार जताया। इन टीमों में प्रेसिडेंट्स काउंसल और सांसद मोहम्मद फैजर मुस्तफा भी शामिल थे। श्रीलंका के सऊदी अरब में राजदूत अमीर अजवाद भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे।
ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल भी पहले शिवरासा की रिहाई की मांग कर चुके थे। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से मौत की सजा और पहले सुनाई गई कैद की सजा दोनों निष्प्रभावी हो गई हैं, और मामला निचली अदालत में दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया गया है। शिवरासा अभी भी हिरासत में हैं और कानूनी कार्यवाही जारी है।